शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2018

पर्यायवाची - “त-वर्ग”

तम:- तमः, तमस्, अंधकार, अँधेरा, तमस, तमसा, तमिस्र, तमिस्रा(स्त्री०), तिमिर, ध्वान्त*
#ध्वान्त { १. ~चर=रक्षस, निशाचर, २. ~शत्रु/शात्रव=सूर्य, अग्नि, चन्द्रमा, श्वेत वर्ण, ३. ~राति/रात्ति=ध्वान्तशत्रु, ४.~उन्मेष =ध्वान्तोन्मेष= जुगनू/खद्योत , ४. ~वित्त=जुगनू/खद्योत }

तरंग:- उत्कलिका*, ऊर्मि, उल्लोल, कल्लोल*, जलकरंक*, जललता, भंग (❓), भृण्डि, भृंमि, मौज*, लहर, वीचि*, हिलकोर / हिलकोरा, हिलोर(स्त्री० ✔), हिलोरा(पु०), हिल्लोल
#उत्कलिका { १. उत्कंठा, २. फूल की कली, ३. तरंग, लहर, ४. वह गद्य जिसमें बड़े बड़े समासवाले पद हों }
#कल्लोल { १. लहर, जल की तरंग, २. मन की लहर, मौज, ३. क्रीड़ा ...कल्लोलित = तरंगित,  कल्लोलिनी👇 = नदी }
#मौज { १. तरंग, हिलोर २. उमंग, सुख, आनंद 😂 }
#वीचि { १. लहर, तरंग २. बीच की खाली जगह, अवकाश ३. चमक, दीप्ति ४. किरण*👆 }
#जलकरंक { १. कमल 👆 २. नारियल ३. तरंग, लहर ४. शंख }

तालाब:- तटाक, तड़ाग(तत्सम), कासार, जलाशय, जल्ला, झील, ताल, दह*, पद्माकर, पुष्कर*, पोखर ( तत्सम-पुष्कर ), बावली, सर*, सरसी, सरोवर, ह्रद*(✔), हृद(❌)
#दह-(तत्सम द्रह) {१. नदी में वह स्थान जहाँ पानी बहुत गहरा हो,नदी के भीतर का गड्ढा, पानी के कटाव से कुआँ, नदी आदि के किनारे पर भोतर की ओर बननेवाला खोखला स्थान -   यौ॰—कालीदह; २. कुंड, हौज; ३. दह- [सं॰ दहन] ज्वाला, लपट, लौ ४. दह- [फा़॰] दस }
#द्रह { १. ह्रद, ताल, झील, २. वह स्थान जहाँ गहरा जल हो, दह* }
#पुष्कर { १. जलाशय, पोखरा २. जल ३. कमल ४. नीलकमल ५. एक तीर्थ जो अजमेर के पास है }
#पुष्कल { १. बहुत, प्रचुर २. परिपूर्ण, पर्याप्त ३. श्रेष्ठ, उत्तम ४. भिक्षा ५. एक प्रकार की वीणा ६. राम के भाई भरत के दो पुत्रों में से एक }
#सर { १. तालाब  २. बाण 🎯 }
#शर { १. बाण 🎯, तीर 🎯 ३. बरछी या भाले का फल 🍎👈 ये वाला फल नहीं, नोंक 😅 }
#ह्रद { १. गहरा जलाशय २. गहरी झील }
#ह्रदिनी { नदी, सरिता 👇, बिजली/चपला👆 }
#हृद { हृदय , दिल 💘 }

तोता:- कीर, दाड़िमप्रिय*, मियाँमिट्ठू, मिट्ठू, रक्ततुण्ड, शुक, सुआ, सुग्गा, सुवा,
#दाड़िम { = अनार }
#सुआ / सुग्गा / सुवा { तत्सम- शुक }

तुरंग:- अश्व 🐎 ( ☝️ )

तूफान:- अंधड़, अंधबाव, अंधप्रभंजन, अंधबाई ( अंधवायु ), आँधी, करीषंकषा, चक्रवात, झंझा, झंझावात, झंझानिल, प्रभंजन, बगूला, बवंडर, महावात, वातचक्र

तेजस्वी:- कांतिमय, कांतिमान्, कांतियुक्त, कांतिवान, तेजवंत, तेजमान्, तेजवान्, तेजवाला, तेजिष्ठ, तेजोमय, तेजोवान्, प्रतापी, प्रतापवाला, प्रभावान्, प्रभावशाली, बलवान, वर्चस्वी, वीर्यवान, शक्तिशाली, इकबालमंद*
#तेजस्वी { तत्सम-तेजस्विन् , तेजस्विनी-स्त्री॰ }
#कांति { ~ मय, ~ मान्, ~युक्त, ~वान }
#तेज { ~वंत, ~मान्, ~वान, ~वाला }
#तेजो / तेजस् { ~मय, ~वान् }

तलवार:- तरवारि ( तत्सम ), असि, ऋष्टि, कृपाण, करवाल, कौक्षेयक, खंग, खड्ग, चंद्रहास, तेग, तीक्ष्णधार, निस्त्रिंश, रिष्टि, विशसन, श्रीगर्भ, शमशीर, शमशेर(✔), शैफ़
#शमशेर { वह हथियार जो शेर की पूँछ अथवा नख के समान हो अर्थात तलवार, खड्ग आदि }

तरुण:- कनीन, कनीनक, जवान, तारुण, नवजवान / नौजवान, नवयुवक, नवयौवन, नवशोभ, मनोज्ञ, युवक, युवा, युवान, शर्कुर

तरुणी:- काहली*, किशोरी, तरुणा, धनीका*, दिक्करी*, नवयुवती, नवयौवना, नवेली, प्रमदा, मनोज्ञा, फतात, युवती, यौवनवती, रमणी, सुन्दरी
#काहिल=आलसी
#धनीका { १. पत्नी, वधू, २. प्रेमिका, ३. युवती, तरुणी }
#दिक्करी { १. तरुणी, जवान, २. (दिक्करिन्) आठो दिशाओं के ऐरावत आदि आठ हाथी- दिग्गज }
#कनीक { १. युवा, २. व्यस्क}...कनीज़ { दासी, लौंडी, बांदी }...कनीनक { १. किशोर, २. आँख का तारा }...कनीनिका { १. आँख का तारा, २. कन्या, ३. कानी उँगली }

थोथा:- अंतःसारशून्य, खोखला, खाली, छूछा, तत्त्वहीन, निष्फल, पोला, निःसार, बिहीन, रिक्त, रीता, रहित, व्यर्थ, शून्य, सारहीन, सुक्ख

थोड़ा:- स्तोक ( तत्सम ) , अल्प, कम, कुछ, किंचित्, ज़रा, ज़रा सा, टुक ( स्तोक ), तनिक( तनु ), तनु, न्यून, परिमित, रंच, रंचमात्र

थकान:- क्लांति, थकन, थकावट, थकाहट, श्रांति, शिथिलता, शैथिल्य

दुर्गा:- अजिरा*, अपराजिता*, अभया, आदि शक्ति, आद्या, ईश्वरी*, कल्याणी, कालिका, कामाक्षी, कामाख्या, कुमारी, चंडा, चंडालिका, चंडिका, चंडी, जगज्जननी, जगदंबा, जगद्गौरी, जगद्धात्री, जगन्नामाता, नंदा*, नंदिनी*, नारायणी, परमेश्वरी, पार्वती(👇), भगवती, भवानी, भार्गवी*, ब्रह्माणी, रुद्राणी, महादेवी*, महामाया, मीनाक्षी, मृडा, मृडानी, शक्ति, सिंहवाहिनी, सुभद्रा, सुरेशी, सर्वमंगला*, ललिता…
नवदुर्गा - १. शैलपुत्री, २. ब्रह्मचारिणी, ३. चन्द्रघण्टा, ४. कूष्माण्डा, ५. स्कन्दमाता, ६. कात्यायनी, ७. कालरात्रि, ८. महागौरी, ९. सिद्धिदात्री।
 प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
 तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति. चतुर्थकम्।।
 पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
 सप्तमं कालरात्रीति.महागौरीति चाष्टमम्।।
 नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना:।। 

दुर्गाबत्तीसनाममाला ( दुर्गाद्वात्रिंशन्नामाला ) - १. दुर्गा, २. दुर्गार्तिशमनी, ३. दुर्गाद्विनिवारिणी,  ४. दुर्गमच्छेदिनी, ५. दुर्गसाधिनी, ६. दुर्गनाशिनी, ७. दुर्गतोद्धारिणी, ८. दुर्गनिहन्त्री, ९. दुर्गमापहा, १०. दुर्गमज्ञानदा, ११. दुर्गदैत्यलोकदवानला, १२. दुर्गमा, १३. दुर्गमालोका, १४. दुर्गमात्मस्वरूपिणी, १५. दुर्गमार्गप्रदा, १६. दुर्गमविद्या, १७. दुर्गमाश्रिता, १८. दुर्गमज्ञानसंस्थाना, १९. दुर्गमध्यानभासिनी, २०. दुर्गमोहा, २१. दुर्गमगा, २२. दुर्गमार्थस्वरूपिणी, २३. दुर्गमासुरसंहन्त्री, २४. दुर्गमायुधधारिणी, २५. दुर्गमांगी, २६. दुर्गमता, २७ दुर्गम्या, २८. दुर्गमेश्वरी, २९. दुर्गभीमा, ३०, दुर्गभामा, ३१. दुर्गभा,  ३२. दुर्गदारिणी।

दुर्गा दुर्गार्तिशमनी दुर्गाद्विनिवारिणी!
दुर्गमच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी !!
दुर्गतोद्धारिणी दुर्गनिहन्त्री दुर्गमापहा !
दुर्गमज्ञानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला !!
दुर्गमा दुर्गमालोका दुर्गमात्मस्वरूपिणी!
दुर्गमार्गप्रदा दुर्गमविद्या दुर्गमाश्रिता !!
दुर्गमज्ञानसंस्थाना दुर्गमध्यानभासिनी !
दुर्गमोहा दुर्गमगा दुर्गमार्थस्वरूपिणी !!
दुर्गमासुरसंहन्त्री दुर्गमायुधधारिणी!
दुर्गमांगी दुर्गमता दुर्गम्या दुर्गमेश्वरी !!
दुर्गभीमा दुर्गभामा दुर्गभा दुर्गदारिणी !
नामावलिमीमां यस्तु दुर्गाया मम मानव:!!
पठेत सर्वभयान्मुक्तो भविष्यति न संशय:!!

#अजिरा { १. दुर्गा, २. वेगवती नदी }
#अजिर { १. आँगन, २. शरीर, ३. वायु, ४. इंद्रियविषय}
#अजर { १. नाशरहित, क्षयरहित, २. जो बूढ़ा न हो, ३. परब्रह्म, ईश्वर का एक नाम, ४. निर्जर, देवता 👇}
#अपराजिता { १. जो जीती न गयी हो, अजेय, २. दुर्गा, ३. विष्णुकांता, ४. अयोध्या नगरी }
@अपराजित { १. जो जीता न गया हो, अजेय, २. विष्णु }
#ईश्वरी { १. दुर्गा, २. लक्ष्मी }
#नंदा { १. दुर्गा✔, २. गौरी, ३. धन-सम्पत्ति, ४. आनंद  देनेवाली, ५. शुभ }
#नंदिनी { १. पुत्री, बेटी 👇, २. दुर्गा✔, ३. उमा }
#भार्गवी { १. दुर्गा, २. लक्ष्मी }
#महादेवी { १. दुर्गा ✔, २. राजा की प्रधान पत्नी, पटरानी }
#सर्वमंगला { १. दुर्गा, २. लक्ष्मी }

दर्शन:- अवलोकन, आमना-सामना, भेंट, मिलन,  मुलाकात, मेल-जोल, मेल-मिलाप, रब्तजब्त, साक्षात्कार, हेलमेल

दहेज:- दायज, दायजा, दाय, सौदायिक

दास:- अनुचर, आज्ञाकर, किंकर, खिदमतगार, गुलाम, गोप्यक, चाकर, टहलुआ, टहलू, ताबेदार, नौकर, नैर्देशिक, जोषक, परिचर, परिचारक, परिकर्मी ( परिकर्मिन् ), पारिकुट, पार्श्वानुचर, भृत, भृतक, भृत्य, सेवक, सेवाजन

दासी:- अनुचरी, किंकरी, चाकरानी(✔), टहलनी, टहलुई, दासिका, नौकरानी, परिचरी, परिचारिका, बाँदी, भृता, भृत्या, लौंडी, सेविका

दामिनी:- अशनि, कौंधा, क्षणप्रभा, गाज, घनज्वाला, घनदाम, घनवल्ली, चपला( 👆 ), चंचला*, तड़ित, दामिनी*, बिजली ( 👇 ), बिजुरी(❓), बीजुरी(✔), विद्युत्, शंपा, सौदामिनी, ह्रदिनी*

दिनांक:- तारीख़, तिथि, मिति

दिन:- दिवस, वासर, वार, अहर, दिवा
#अहरह - प्रतिदिन, नित्य, लगातार
#अहर्निश - दिन-रात, नित्य, लगातार 

दीपावली:- चरागान, दीवाली, दीपमालिका, दीपमाला, दीपोत्सव, प्रकाशपर्व, प्रकाशोत्सव

दु:ख:- अंदोह, अवसाद, आपदा, आफत, आभील, उदासी, कष्ट, क्लेश, खेद, जहमत, तकलीफ, तरदुदुद, दर्द, पीड़ा, पीर, मुसीबत, यंत्रणा, यातना, रंज, वियम*, विपत्ति, विषाद, वेदना, व्यथा, शोक, संकट, संताप, खटका
#वियम { १. संयम, इंद्रियदमन, २. दुःख, क्लेश, यातना, ३. प्रतिबंध, रोक, नियंत्रण, ४. विराम, पड़ाव }

दूध:- दुग्ध, क्षीर*, गोरस*, पय*(पयस्), पीयूष*
#क्षीर { १. दूध, २. खीर, ३. पानी }
#क्षीर { ~निधि=क्षीरसागर, ~नीर= (१. आलिंगन, गले मिल जाना, २. दूध और जल),  ~नीर करना/~नीर विवेक = दूध का दूध, पानी का पानी करना अर्थात् सही गलत का विवेक, ~पाक=दूध में पकाया हुआ, ~मय=दूग्ध-युक्त, ~व्रत=केवल दूध पीकर रहने वाला, ~सागर=क्षीरनिधि }
#क्षीरपाकौदन {(क्षीर + पाक + ओदन) दूध में पकाया हुआ चावल खीर, जाउर;  उ॰—क्षीरपाकोदन अर्थात् दूध में पकाए हुए भात ( जिसे खीर कहते हैं ) का उल्लेख ऋग्वेद में है। }
#गो { १. गाय, २. इंद्रिय, ३. वाणी, ४. जिह्वा👆, ५. देखने की शक्ति, दृष्टि, ६. दिशा, ७. माता, जननी }
#गो {~कुंजर=बलिष्ठ बैल, ~घात=गोहत्या, ~घातक/घाती=कसाई, ~जल=गोमूत्र, ~धूलि=साँझ, शाम, ~पति=गाय का स्वामी, गोपाल *, ~पद=गोखुर, ~पाल=१. गऊ का स्वामी, २. अहीर, ग्वाला, ३. इंद्रियों का पालन एवं रक्षा करने वाला, मन, ४. कृष्ण*, ~मय/मल=गोबर, ~मुख=१. गाय का मुख, २. गंगा का उद्गम स्थान जो गोमुखाकृति है, गंगोत्री, ~रस=१. गाय का दूध, २. दही, ३. छाछ, मट्ठा आदि, ~रसा=जो गाय का दूध पीकर पला हो ऐसा बच्चा, ~लोक=स्वर्ग, ~वर्धन=१. गायों को पालने का काम, २. वृंदावन का एक पर्वत जिसे कृष्ण ने उठाया था, ~सर्ग=गायों को बाहर छोड़ने का समय/प्रात: काल, ~स्वामी=जितेन्द्रिय }...#गो(फ़ा०)= गुप्तचर, जासूस, भेदिया
#पय { १. दूध २. पानी }, पयस्व { दूध से बनी वस्तु }, पयस्विनी { १. नदी, सरिता, २. दुधारू गाय 🐮 }, पयस्वी { १. दूध से युक्त, २. जलमय }, पयहारी { १. केवल जल पीकर रहने वाला व्यक्ति या साधु , २. केवल दूध पीकर रहने वाला व्यक्ति या साधु }
#पीयूष  { १. अमृत, सुधा, २. दूध, ३. नव- प्रसूता गाय का दूध (५/६दिन) इसे पेउस/पेउसी(बोली✔) कहते हैं }
#पीयूष { ~द्युति, ~धाम, ~भानु, ~भुक, ~मयूख, ~महा, ~रुचि=चंद्रमा 👆 }

देवता:- अजर, अमर, अमर्त्य, अमृतेश*, अपहर्य, आदित्य, त्रिदश, देव, निर्जर, विबुध (✔ ), विवुध ( ❌ ), सुर
#अमृतेश { १. देवता, २. शिव }
#आदित्य 👆 { १. अदिति के पुत्र, २. देवता, ३. सूर्य, ४. इंद्र }

देह:- अंग, अप्तु*, कंकालय, कलेवर, काय, काया, कुड़ि, क्षत्र, गात ( गात्र ), गात्र, चोला, जिस्म, जीवमंदिर, घट, तन, तनु, बदन, प्राणसद्म ( प्राणसद्मन् ), मूर्ति, मूर्त्तिमान्, पिंड, रोगभू, वपु, विग्रह, शरीर, शरीरक
#अप्तु { १. शरीर, गात्र, अंग, २. सोम, ३. यज्ञीय पशु, बलि पशु }

दैत्य 😈:- राक्षस, दानव, निशाचर, असुर

दैनिक:- नित्य, प्रतिदिन, रोज़मर्रा, प्रात्यहिक, आह्वा, प्रतिवासिक, अन्वाहिक

द्रव्य:- धन 💰 ( 👇 )

द्रौपदी:- कृष्णा, कृष्णसखी, त्रिहायणी, द्रुपदसुता, द्रौपदेय, नित्ययौवना, पंचभर्तारी*, पुण्यश्लोका*, पांडुशर्मिला, पांचाली, वेदिजा, याज्ञसेनी, सत्यसंधा, सैरंध्री,
#पंचभर्तारी{( पञ्च + भर्तार + हिं॰ ई (प्रत्य॰)}
#पुण्यश्लोका { १. सीता, २. द्रौपदी }

दरवाजा:- किवाड़, कपाट, पल्ला, पुरतोरण, प्रवेशद्वार, फाटक, मंगलद्वार, तोरण, दरबंद, द्वार, निकासद्वार

द्विज:- १. पक्षी, २.द्विज वर्ण ( ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य ), ३. दाँत 🦷 


धनंजय:- अर्जुन के १० नाम - १. अर्जुन, २. कृष्ण, ३. किरीटी, ४. जिष्णु, ५. धनंजय, ६. फाल्गुनि, ७. विजय, ८. वीभत्सु, ९. श्वेवाहन, १०. सव्यसाची
#अन्य नाम:- कृष्णसखा, कृष्णसरथि / कृष्णसारथि, कीशध्वज, कीशकेतु,  पार्थ, पृथातनय, पृथाज, कौन्तेय, गुडाकेश, गांडीवधन्वा, गांडीवधारी, गांडीवी(गांडीविन्), गांडीवधर, चित्रयोधी, वृहन्नला, परंतप, शिवमल्लक, सुभद्रेश, कर्णजित्
#'गीता' में आने वाले नाम- 'पार्थ', 'भारत', 'धनंजय', 'पृथापुत्र', 'परन्तप', 'गुडाकेश', 'निष्पाप' तथा 'महाबाहो',

धनुर्धर:- इषुधर*, इष्वास* कमनैत, कमानदार, क्षिपक*, चापी ( चापिन् )*, तीरंदाज, तूणधर, तूणधार, धनुर्ग्राह, धन्वी, धन्वायी ( धन्वायिन् )*, धनुषधारी, धनुष्कर*, धानक*, धानकी*, धानुक*, निषंगी*, निषंगथि*, सरबंधी ( शरबंध ), सिनाकश, सुप्रयुक्तशर
#इषु { बाण, तीर 🎯 }
#इष्वास { १. बाण चलाना, २. धनुष, ३. धनुर्धर, ४. योद्धा }
#क्षिपक { (क्षिपिका-स्त्री०) योद्धा, धनुर्धर }
#चापी { १. वह जो धनुष धारण करे, धनुर्धर, २. शिव, ३. धनुराशि }
#धन्वायी { १. धनुर्धर, २. रुद्र }
#धनुष्कर { १. धनुर्धारी, २. धनुष निर्माता }
#धनुर्द्धर/धनुर्द्धारी/धनुर्धारी (✔)
#धानक { १. धनिया, २. धनु चलाने वाला }
#धानकी/धानुक { १. धनुर्धर, धनुर्धारी, २. कामदेव }
#धानुक { १. धनुर्द्धर, कमनैत, २. कहारों की तरह सेवा करने वाली एक जाति, ३. इस जाति का व्यक्ति, कहार }
#निषंगी { १. आसक्त, २. धनुर्धारी, ३. खड्गधारी }
#निषंग { १. तरकश, तूणीर, २. तलवार }
#निषंगथि { १. आलिंगन, २. रथ, ३. कंधा, ४. तृण, ५. सारथीं, ६. धनुष धारण करनेवाला, धनुर्धर }

धनुष:- इष्वास, कमान, कोदंड*, चाप*, धनु, धनुआ, धनुई, धनुक, पिनाक(❓), विशिखासन, शरासन
#कोदंड { १. धनुष, २. धनु राशि, ३. भौंह }
#चाप { १. चापने की क्रिया, २. पैरों की आहट, ३. धनुष, ४. वृत्त की परिधि का कोई भाग, ५. मेहराब }
#धनुआ { १. कमान, धनुष, चाप, २. धुनकी*}
#धुनई { १. छोटा धनुष, २. धुनकी* }
#धनु/धनुक { कमान, धनुष }
#धुनकी { १. रुई धुनने का एक प्रसिद्ध उपकरण, फटका, २. धनुष }
#पिनाक { शिव का धनुष }
#पिनाकी { शिव, महादेव }

धन:- जायदाद, द्रव्य, दौलत, निधान, निधि, पैसा, माल*, माया*, रकम, रुपया, लक्ष्मी, सम्पत्ति ( 👇 ), श्रीत्वम्(❓)
{ धन-दौलत, रुपया-पैसा, जमीन-जायदाद, जीवनोपाय }
#निधान { १. सम्पत्ति, निधि, २. स्थापना, ३. आधार, आश्रय; जैसे - करुणा-निधान }
#निधि { १. सम्पत्ति, धन-दौलत, २. आश्रय स्थान; जैसे - दयानिधि, ३. विशेष उद्देश्य हेतु संचित धन, फंड ; जैसे - भविष्यनिधि, ४. समुद्र, ५.  आधार, घर; जैसे- जलनिधि, गुणनिधि, ६. विष्णु, ७. शिव, ८. व्यक्ति जो विविध गुणयुक्त हो, ९. वह स्थान जहाँ संपत्ति, द्रव्य आदि रखा जाय, १०. कुबेर के नौ प्रकार के रत्न । ये नौ रत्न ये हैं—पदम, महापद्म, शंख, मकर, कच्छप, मुकुंद, कुंद, नील और वर्च्च, ११. गड़ा हुआ खजाना, खजाना }
#माल { १. कीमती वस्तु, २. धन-दौलत, रुपया-पैसा, ३. लगान के रूप में दिया गया धन अर्थात् माल-गुजारी, लगान, कर, ४. सुन्दर और स्वादिष्ट 😋 भोजन 🍴, ५. युवती और सुन्दर स्त्री जैसे -माल के पीछे भागना }
#माया { १. धन, २. दया, ममता, ३. माँ, ४. दुर्गा का एक नाम , ५. सृष्टि को उत्पत्ति का मुख्य कारण, प्रकृति, ६. मोहकारिणी शक्ति, ७. इंद्रजाल, जादू, ८. छल, कपट, धोखा, चालबाजी, १०. भ्रमवश होने वाला प्रेम, अनुराग; जैसे - रूप की माया, ११. ममत्व, ममता, १२. अविद्या, अज्ञानता, भ्रम; जैसे - माया मृग, १३. ईश्वरीय शक्ति; जैसे - प्रभु की माया, १४. मय दानव की कन्या जो विश्रवा को ब्याही थी और जिससे खर, दूषण, त्रिशिरा और सूर्पनखा पैदा हुए, १५. प्रज्ञा, बुद्धि, अकल, १६. कोई आदरणीय स्त्री, १७. गौतम बुद्ध की माता का नाम, १८. कोई आदरणीय स्त्री, १९. कृपा, दया, अनुग्रह }
#श्रीत्वम्{ धनिकता-सम्पत्ति = bonanza opulence prosperity wealth = ऐश्वर्यम् प्रभुत्वम् धनिकता प्रतापम्

नगर 🏙:- पुर, शहर, क़िला, नगरी, पुरी, पत्तन

नयन:- आँख ( ☝️ )

नवोढ़ा:- नवविवाहिता, सूर्या

नदी:-अपगा, आपगा, ऋषिकुल्या*, कल्लोलिनी, कूलंकषा, कूलवती, जलधिका*, तटक, तटिनी, तटी*, तरंगवती, तरंगिणी, दरिया, धुनी*, नदिया,  निर्झरणी, निम्नगा, पयस्विनी, वाहिनी*, समुद्रगा*, सरि, सरित्, सरिता, स्रवंती*, स्रोतस्विनी, ह्रदिनी*
#ऋषिकुल्या { एक नदी का नाम जिसका उल्लेख महाभारत के ती्र्थयात्रा पर्व में है }
#तटी { १. नदी का किनारा, कूल, तट, २. नदी }
#जलधिका = नदी ... जलधि = समुद्र ... जलद = मेघ, बादल
#तरिणी(❓)...तरणी = तरनी = नाव, नौका ... तरणि = सूर्य
#धुनी = नदी, ...सुरधुनी = गंगा 👆
#वाहिनी { १. सेना, २. नली; जैसे-रक्तवाहिनी, ३. नदी }
#समुद्रगा { १. नदी जो समुद्र की ओर गमन करती है, २. गंगा का एक नाम 👆 }
#स्रवंती {१. नदी, दरिया, २. प्रवाह, धारा, ३. एक प्रकार की वनस्पति, ४. प्लीहा का क्षेत्र, यकृत् प्रदेश }
#ह्रदिनी { १. नदी, २. बिजली, विद्युत् }

नरक:- अधोनिलय, जहन्नुम, दोज़ख, दुर्गति, निरै ( निरय ), पापलोक, प्रेतपुर, प्रेतलोक, यमलोक, यमपुर, यमालय, यमसदन, संयमनी

नमक:- जलरस, नोन, नून, रामरस*, लवण ( तत्सम ), लोन
#रामरस { १. नमक, २. पीसी या बनी हुई भंग ( मदरास ) }

नक्षत्र:- अख्तर*, उड्डु, ऋक्ष*, खद्योत*, तरई ( तारा ), तारा*, तारक*, सितारा*, स्तृ
#अख्तर { १. सितारा, तारा, नक्षत्र , २. ध्वज 👆, ३. भाग्य, प्रारब्ध, किस्मत 👉 मुहा॰—अख्तर चमकना = भाग्योदय होना, नसीब खुलना, अच्छे दिन आना }
#ॠक्ष { १. भालू, २. तारा }
#खद्योत  { १. जुगनूँ, २. सूर्य }
#तारा { १. सितारा, नक्षत्र, २. बालि की पत्नी का नाम जिनके पुत्र अंगद थे, झर्झरिका, ( ताराकुमार=अंगद; तारेय=अंगद }
#तारक { १. नक्षत्र, तारा, २. आँख, ३. आँख की पुतली, ४. इंद्र का शत्रु एक असुर, नारायण ने नपुंसक रूप धारण करके इसका नाश किया, ५. एक असुर जिसे कार्तिकेय ने मारा था- 'तारकासुर'  यौ॰—तारकजित्, तारकरिपु, तारकवैरी, तारकसूदन = कार्तिकेय , ६. राम का षडक्षर मंत्र जिसे गुरु शिष्य के कान में कहता है और जिससे मनुष्य तर जाता है- 'औ' रामाय नमः', ७. वह जो पार उतारे, ८. कर्णधार, मल्लाह, ९. भवसागर से पार करनेवाला, तारनेवाला, १०. एक वर्ग का नाम, जो अंत्येष्टि कराता है—'महाब्राह्मण', ११. गरुड़, १२.  कान, १५. महादेव, १६. मुद्रण में तारे का चिह्न- * }
#सितारा { १. तारा, नक्षत्र, २. भाग्य, प्रारब्ध, नसीब }

नंगा:- नग्न ( तत्सम ), अनाच्छादित, अनावृत, असंवृत, आवरणहीन, उघारा, उघाड़ा, उघरारा, खुला, दिगम्बर, नंग-घड़ंग, निरावरण, निरावृत, निर्वस्त्र, विवस्त्र, वस्त्रहीन, व्यावृत्ति

नश्वर:- अध्रुव, अनित्य, अस्थायी, अस्थिर, क्षणभंगुर, क्षणिक, क्षयवान्(स्त्री०-क्षयवती), क्षीयमाण, क्षर*, गत्वर, चंदरोजा, नाशधर्मी, नाशमय, नाशमान्, नाशवान्, नाशाधीन, मरणधर्मा, मरणशील, विनाशधर्मा, विनाशी, विशरारु
#क्षर { १. नाशवान्, नष्ट होनेवाला, २. चल, जंगम, १. जल २. मेघ }

नारी:- औरत, कामिनी, तनु*, भामा, भामिनी, महिला, रमणी, रमण्या, ललना*, ललिता*, वनिता, वामा, सुध्युपास्या*, स्त्री
#तनु { १. शरीर, देह, बदन, २. चर्म, त्वचा, ३. नारी, औरत, स्त्री✔, ४. कृश, दुबला-पतला, ५. अल्प, थोड़ा, ६. तुच्छ, ७. छिछला, ८. कोमल, सुकुमार, ९. अच्छा, बढ़िया, १०. विरल, ११. केंचुली ...१२. ~ज=पुत्र, १३. ~जा=पुत्री }
#जोरू, पत्नी, अर्द्धांगिनी ...❓
#ललना ( नारी )...ललन ( बालक )
#ललिता { १. महिला, कामिनी, सुंदरी स्त्री, २. दुर्गा का एक नाम 👆, २. राधिका की प्रधान आठ सखियों में से एक, ३. कस्तूरी, ४. पुराणोक्त एक नदी, ५. एक रागिनी }
#सुध्युपास्या { १. औरत 👩, नारी, स्त्री, २. पार्वती, उमा, ३. पार्वती की एक सखी, ४. एक प्रकार का रंग 🎨 }

नाव:- किश्ती, गामिनी, जलपोत, जलयान, डोंगा, डोंगी, तरंड*, तरंडपादा, तरंती, तरणी, तरी, नाय, नौका, नैया, पतंग, पोत, प्लवाका*, बतवन्हा, बेड़ा, भेलक, वहित्र, वाधू*, वार्बट
#तरंड { १. नाव, नौका, २. मछली मारने की डोरी में बँधी हुई लकड़ी जो पानी के ऊपर तैरती रहती है, ३. नाव खेने का डाँड़ा, ४. बेड़ा }
#तरंडपादा { एक प्रकार की नाव }
#पतंग { १. सूर्य👆, २. नाव✔, ३. टिड्डी(grasshopper), शलभ, ४. फतिंगा/पतिंगा(moth), ५. कनकौआ/कनकौवा, गुड्डी, पतंग (उड़ने वाली जो कागज़ की होती है) ६. गेंद, कंदुक, ७. पक्षी👇 }
#प्लवाका=नाव, @प्लवक { १. तैरनेवाला, तैराक,  २. संतरणोपजीवी, जैसे मल्लाह, ३. तलवार की धार पर नाच करनेवाला पुरुष,  ४. मेंढ़क }
#वाधू { १. नाव का डाँड़ , २. नौका, नाव }

नाविक:- कर्णधार, केवट, कैवर्त ( तत्सम ), डाँड़ी, तारक, धीमर, धीवर ( तत्सम ), नौचालक, नावचालक, नावी, पोतवाह, पोतचालक, मल्लाह, माँझी

निशीथ:- यामिनी ( ☝️ )

नित्य:- अक्षय, अखीन ( अक्षीण ), अनश्वर, अमर, अमर्त्य, अविनश्वर, अविनाशी, अहरह, अहर्निश*, चिरस्थायी*, त्रिकालव्यापी, ध्रुव*, निरंतर, शाश्वत, सतत्, सदा*, सदैव, सनातन, सर्वदा,
#अहर्निश { १. रातदिन✔,  २. सदा, नित्य }
#नित्य:- { १. प्रतिदिन, रोज, सदा, हर रोज, ~कर्म  २. अनवरत, सदा, सर्वदा, हर समय, हमेशा, ३. अविनाशी, शाश्वत, निरंतर }

नियति:- अख्तर*, अदृष्ट*, अवश्यंभावी(❓), कालयोग, किस्मत, तक़दीर, दिष्ट*, दिष्टि*, दैव, दैवगति, दैवीगति, दैव्य, नसीब, प्राक्तन, प्रारब्ध, भवितव्य, भवितव्यता(स्त्री०), भाग्य, भावी, मुकद्दर, लिखनी*, विधना*, विधि, होतब, होतव्यता, होनहार, होनिहार(स्त्री०), होनी
#अख्तर { १. सितारा, तारा, नक्षत्र 👆, २. ध्वज 👆, ३. भाग्य । प्रारब्ध । किस्मत 👉 मुहा॰—अख्तर चमकना = भाग्योदय होना, नसीब खुलना, अच्छे दिन आना }
#अदृष्ट { १. न देखा हुआ, २. भाग्य 🌠 }
#दिष्ट { १. भाग्य, किस्मत, २. उपदेश, ३. समय, काल, ४. निश्चित, बतलाया हुआ, ५. दिखलाया हुआ }
#दिष्टि { १. भाग्य, २. उत्सव, प्रसन्नता }
#दैव { १. देवता संबंधी; जैसे - दैव कार्य, २. देवता की ओर से होने वाला कार्य; जैसे - दैव-गति, ३. होनी, प्रारब्ध ✔ , ४. ईश्वर, विधाता👆}
#दैवगति { १. ईश्वरीय घटना, २. भाग्य 🌠, किस्मत }
#दैवीगति { १. ईश्वरीय गति, २. भावी, होनहार }
#दैव्य { १. देवता संबंधी २. दैव, ३. भाग्य 🌠 }
#लिखनी  { (लेखनी) १. कलम, २. भाग्यलिपि, प्रारब्ध, होनी, ३. लिखन की क्रिया या भाव }
#विधना { १. बेधना, २. प्राप्त करना, ३. बेधा जाना, ४. फंसाया जाना, ५. होनी, अदृष्ट ✔ }
@नियतेंद्रिय=नियतात्मा=जितेंद्रिय

निर्धन:- अकिंचन, अनिभ्य, अवित्त, कंगाल, कठेर*, गतार्थ*, गरीब, तंगहाल*, दरिद्र, दीन*, दु:स्थ*, धनहीन, भिन्नमर्याद, मुफ़लिस, रंक, विधन
#कठेर { १. कष्टग्रस्त पीड़ित, २. निर्धन, रंक }
#गतार्थ { (गत=नष्ट/विहीन/रहित या प्राप्त) १. धनहीन, निर्धन, २. अर्थरहित, अर्थहीन, ३. जाना या समझा हुआ, ४. बेकार }
#तंगहाल { १. निर्धन, गरीब, २. विपद्ग्रस्त, कष्ट में पड़ा हुआ, ३. बीमार, रोगग्रस्त, मरणासन्न }
#दीन { १. दयनीय दशा वाला, २. गरीब, दरिद्र, ३. दु:खी एवं संतप्त, ४. उदास, खिन्न, ५. धर्म, मजहब }
#दु:स्थ { १. दुर्दशाग्रस्त, २. निर्धन, ३. मूर्ख }
#भिन्नमर्याद { १. जिसने मर्यादा भंग कर दी है, २. जो निर्धन हो, आनियंत्रित }
#अवित्त { १. निर्धन, २. अप्रसिद्ध, ३. अज्ञात }

नुकीला:- सुच्यग्र, तीक्ष्याग्र, कटाग्र

नैसर्गिक:- प्राकृतिक, स्वाभाविक, वास्तविक

न्यायाधीश:- अक्षपाटक, अधिकरणभोजक, अधिकरणिक, आधिकरणिक*, जज, धर्माधिकरणिक, धर्माधिकारी, धर्माध्यक्ष, धर्माधिपति, न्यायकर्ता, न्यायाधिकारी, न्यायाधिपति, न्यायाध्यक्ष, न्यायमूर्ति, प्राडविवाक*, मुंसिफ, वारवाणि*, विचारक, विचारकर्ता, विचारपति, विचाराध्यक्ष,  व्यवहारद्रष्टा(व्यवहारद्रष्ट), विवाक
#आधिकरणिक { १. न्यायाधीश, २. सरकारी अधिकारी }
#न्यायाधिवक्ता=एडवोकेट
#वारवाणि { १. वंशी बज, नेवाला, २. उत्तम गायक, ३. घर्माध्यक्ष, न्यायाधीश, जज, ४. ज्यौतिर्विद, ज्योतिषी, ५. वर्ष, ६. वेश्या, रंडी }

नरेन्द्र:- अवनिप/अवनीप, धरणीश्वर*, धराधिपति, धराधीश, नरपति, नरपाल, नरेश, नृप, नृपति, नृपाल, नरेश्वर, भट्टारक*, भूप, भूपति, भूपाल, भूमिपति(=भूपति), भूभर्ता*, भूभृत्*, महीप, महीपति, महीपाल, राजन्, राजा, राजाधिराज*, राजेश्वर*, रायरायान*, राव, सम्राट्
#धरणीश्वर { १. शिव, २. विष्णु, ३. भूपति, राजा✔ }
#नृ = नर, मनुष्य
#भट्टारक { ( १. माननीय ), ( १. राजा, २. मुनि, ३. पंडित ) }
#भूभर्ता { (भू + भर्तृ) १. पृथ्वी का स्वामी, राजा, २. पर्वत, भूधर }
#भूभृत् { १. राजा, २. पहाड़ ३. विष्णु }
#भर्तृ/भर्ता/भृत्= पालन-पोषण करने वाला, स्वामी
#राजाधिराज { राजाओं का राजा, सम्राट }
#राजेश्वर = राजाधिराज
#रायरायान { १. राजाधिराज, राजाओं के राजा, २. मुगलों के समय का एक उपाधि जो प्रायः रईसों, जमीदारों और राजकर्मचारियों आदि को दी जाती थी, ३. अलाउद्दीन खिलजी ने देवगिरि के शासक 'रामदेव' को "रायरायान" की उपाधि दी थी }



गुरुवार, 27 सितंबर 2018

पर्यायवाची - “ट-वर्ग”

टेक:- अवलम्ब, अवष्ठंभ, आधार, आलंब, आश्रय, उपघ्प, उपस्तम्भ, धर्त्र, परिवारता, प्रश्रय, भरोसा, श्रय, श्रयण, श्राय, समुपष्टम्भ, सहारा, हस्तावलम्ब

टेढ़ा:- कुटिल, टेढ़ा-मेढ़ा, तिरकस, तिरछा, नम्रांग, कुञ्चित, प्रतिकुञ्चित(?), बलदार, बाँका, बेढंगा, बेडौल, वंक, वंकट, वक्र, वंक्य(वङ्क्य), विभुग्न, व्याभूग्न

टीका:- टिप्पणी(?), ब्यौरा, भाष्य, भाषांतरण, वार्तिक(?), विवृति*, विवेचन, विवरण, वृत्तांत, वृत्ति, व्याख्या
#विवृति { १. भाष्य, टीका, २. प्रकटीकरण }
#विवृत्ति { १. फैलाव, विकास, २. चक्कर खाना, घूमना, ३. विवृत्त होने का भाव }

ठग:- अड़ीमार, छली, जालसाज़, धूर्त, धोखेबाज़, प्रतारक, प्रवंचक, वंचक {चतुर 👆}

ठगी:- प्रतारणा, वंचना, मायाजाल, फ़रेब, चालबाज़ी, धोखेबाज़ी, जालसाजी {👆 }

ठिठोली:- उपहास, चुटकी, चुहलबाजी, ठट्ठा, फबती, परिहास, मजाक, व्यंग्य, व्यंगोक्ति, हंसी, विनोद, प्रमोद, दिल्लगी, ठठोल, हँसी-मज़ाक़ 

डाकिया:- चिट्ठीरसान, डाकवाला, पत्रवाह, पत्र-वाहक, 

डायरी 📔 :- रोजनामचा, दैनिकी, दैनंदिनी, अबारजा, 
# { प्रात्यहिक, आह्वा, प्रतिवासरिक, रोजमर्रा, अन्वाहिक = दैनिक नित्य, प्रतिदिन }

डोरी:- रस्सी, डोर, जीवा, जेवरी, सुतरी, सुतली, तनी, रज्जु, {पाश, बंधन, गुण(?),}

ढाढ़स:- आश्वासन, उत्साह* इतमीनान, ढारस, तशफ्फी, तसकीन, तसल्ली, दिलासा, धीरज, भरोसा*, विश्वास*, सांत्वना, हिम्मत, हौसला

ढीठ:- धृष्ट (तत्सम), अक्खड़, अशिष्ट, असभ्य, अविनीत, उजड्ड, उद्दंड, उद्धत, गुस्ताख़, प्रगल्भ, बदतहज़ीब, बेशरम, बेअदब, शोख, दु:साहसी ( दुस्साहसी ), बदहिम्मत, हियाववाला

ढोंगी:- कपटी, कपटिक, कूटकर्मा ( कूटकर्मन् ), चालबाज़, छली, छलछिद्री / छलछिद्र, डिंभिया, ढकोसलेबाज, दम्भक, दम्भी, पाखंडी, प्रतारक, पात्रेसमित, प्रपंची(प्रपञ्चिन्), फरेबी, बकव्रती( वकव्रतिन् - वक वृत्तिवाला ), बगला भगत, बकध्यानी ( बक + ध्यानिन् ), मक्कार,  बंचक / वंचक, रंगा सियार, सव्याज, सर्वाभिसंधी ( सर्वाभिसन्धिन् ) , हिपोक्रिट

बुधवार, 26 सितंबर 2018

पर्यायवाची - “च-वर्ग”




चाँदनी:- अंजोरिया, अकल्का, अमृततरंगिणी, उजियारी, कामवल्लभा, कुमुदकला, कौमुदी, चंद्रमरीचि, चंद्रिका, चंद्रज्योति, चन्द्रिमा, चन्द्रगोलिका, चान्द्री,  जुन्हाई, ज्योत्सना, ज्योत्स्ना ( शुद्ध वर्त ), जोन्हाई/जुन्हैया ( तत्सम-ज्योत्स्ना ), मुदी, शशिप्रभा, सितयामिनी, सोमकर

चन्द्रमा:- अब्ज, अमति, अमृतदीधिति, अमृतसू, अमृतकर, इंदु, उडुप, ओषधीश, कलानिधि, कलानाथ, कुमुदेश, कांत, कलावान्, कलामृत, कुमुदबन्धु, कुमुदनाथ, कुमुदपति, कुमुदबांधव, कुमुदसुह्रत्, कौमुदीपति, कुमुदिनीपति, क्लेदु, क्षारोदतनय, क्षीरोदनंदन , क्षपाकर, क्षपापति, क्षुधासूति, खचमस, खिदिर, ग्लौ*, चणभृत्, चाँद, चन्द्र, चन्दिर, चित्राचीर, छरयाभृत्, जैवातृक*, ज्योत्स्नेश, तमीपति, तमोनुद, तारापति, तारापीड, तारकेश, तारकेश्वर, तिथिप्रणी, तमोहर*, तुषारकिरण, तुंगी(?), तुगीपति (?), त्रिनेत्रचूडामणि, दक्षजापति, दशवाजी(दशवाजिन्),  दाक्षायणीपति*, द्विजराज*, द्विजपत्ति, द्विजपति*,  दोषाकर, दशास्य, निशारत्न*  (१. चंद्रमा । २. कपूर), नक्षत्रराज, नक्षत्रराज, नक्षत्रनेमि, निधि(?), निशाकर, निशाब्जति, निशानाथ, निशिपति, निशामणि, परिज्ञा, पीयूषू- महा, पक्षधर*, पत्रज(?), पक्षजन्मा(पक्षजन्मन्), पक्षज(?), पर्ब्बधि,  पीयूषमहा(पीयूषमहस्-अमृतमय किरणोंवाला अर्थात् चन्द्रमा), मयंक, मृगलांछन, मृगांक, यामिनीनाथ, यामिनीपति, रजनीकान्त, रजनीपति, रजनीश, रजनीकर, रोहिणीश, रोहिणीपति(चन्द्रमा,वसुदेव, वृषभ}, राकापति, राकेश, लक्ष्मीसहज ( सहज=सहोदर, सगा भाई, एक ही साथ उत्पन्न ), विकस, विधु, विभाकर, विश्वस्पा, शशधर*, शशि, शशांक, शीतरश्मि, शीतभानु, शीतमरीचि ( १. चंद्रमा, २. कपूर ), तमोहर*, शशभृत् ( १. चंद्रमा २. कपूर ), श्वेतद्युति, शुभ्रांशु, शर्वरीश, श्वेतवाहन, श्वेतवाजी{ (श्वेतवाजिन्)१. सफेद घोड़ा, २. चंद्रमा, ३. अर्जुन, ४. कपूर)}, समुद्रनवनीत ( १. अमृत, २. चंद्रमा ), सारंग, सिप्र, सिंधुजन्मा*, सुधाकर, सुधांग, सुधानिधि, सुधाधर, सुधाधार, सुधांशु, सिंधुनंदन, सोम, हरि(?), हिमकर, हिमांशु, हिमद्युति, हरिणांक ( १. चन्द्रमा, २. कर्पूर)
#अंभोज { १. कमल, २ कपूर, ३. चन्द्रमा, ४. शंख )...
# जैवातृक {१. कपूर, २. चंद्रमा, ३. औषध, ४. किसान, ५. पुत्र, ( जैवातृकी- दीर्घायु ) }... 
#ग्लौ {१. चंद्रमा, २. कपूर, ३. पृथ्वी  }...
#द्विजराज / द्विजपति { १. ब्राह्मण, २. चंद्रमा, ३. कपूर, ४. गरुड़, ५. श्रेष्ठ ब्राह्मण }... 
#शशधर{ १. चंद्रमा, २. कपूर, कर्पूर }... 
#क्षपाकर{ क्षपा=रात्रि, क्षपाकर-१. चंद्रमा, २. कपूर } ... 
#दोषाकर { दोषा=रात्रि/रात} ... 
#शीत- रश्मि { शीतरश्मि -१. चंद्रमा, २. कपूर } ... 
#श्वेतवाहन { १. चंद्रमा, २. अर्जुन का एक नाम,  ३. समुद्र का मकर, ४. शिव का एक रूप या मूर्ति, ५. कपूर ६. हरिवंश के अनुसार} ... 
#अमति { १. समय, काल; २. चंद्रमा, ३. आकार, ढाँचा; ४. अभाव, ५. बुरा या निकृष्ट व्यक्ति, ६. अज्ञान, ८. अदूरदर्शिता, ९. संज्ञाहीनता, १०. कुटिल } ...
#पक्षधर { १. पक्ष का आदमी, तरफदार; २. पक्षी, ३. चंद्रमा, ४. समूह से भटका हुआ हाथी } ... 
#सिंधुजन्मा { १. चन्द्रमा, २. सेंधा नमक } ... 
#दशास्य{ १. दशमुख / रावण, २. चन्द्रमा } ... 
#दाक्षायणीपति { १.चन्द्रमा, २. शिव } ...  
#तमोहर { १. चंद्रमा, २. सूर्य, ३. अग्नि, ४. ज्ञान ५. अंधकार दूर करनेवाला, ६. अज्ञान दूर करनेवाला } ... 
#तमोनुद{ १. ईश्वर, २. चंद्रमा, ३. अग्नि }...

चंद्रहास:- तलवार ( ☝️ )

चतुर:- अंटीबाज, उपाधिक, कपटी, कुशल, कूट, कूटच्छदमा (कूटच्छद्मन्), कुहन, काँइयाँ, कटकना,  चंट(तत्सम-चण्ड), चगड़, चाँइयाँ, चालाक, चालबाज, छटैल, छली, छतीसा, छादि्मक, छित्वर, जर्द, जुलबाज, ठग(स्थग), ढंगी/ढंग, ढोंग/ढोंगी(?), तिकड़मी, दक्ष, दगाबाज/दगाबाजी, धूर्त, नटखट, नागर, निपुण, नौसरिया, पचकल्यानी, पटु, पुरफन,  प्रपंचबुद्धि, प्रमत, प्रवीण, प्रतारक, फरेबी, फ़ैलसूफ़, भँडेरियापन, भँडेरी, मक्कार, मुतफन्नी, मुफ्तरी, वंचक, वक्रधी, वक्रगति, वक्रगामी, विज्ञ, विदग्ध, विवंचिषु / विवञ्चिषु, विप्रलंभी (विप्रलम्भिन्), व्यवहारकुशल, शीलगुप्त, शय्याद, सयाना, सोखा, होशियार, हिपोक्रिट

चपला:- चंचला*, कौंधा, क्षणप्रभा, तड़ित, दामिनी*, घनज्वाला, घनदाम, घनवल्ली, बिजली, बिजुरी(❓), बीजुरी(✔), विद्युत्, सौदामिनी, ह्रदिनी*
#चपला { १. बिजली, विद्युत्; २. लक्ष्मी ३. जिह्वा ४. दुश्चरित्र स्त्री ५. चपल, चंचल }...
#चंचला { १. बिजली, विद्युत् २. लक्ष्मी }...
#दामिनी { १. बिजली, विद्युत् , २. बिंदी या बिंदिया -स्त्रियों का एक शिरोभूषण }
#ह्रदिनी { १. नदी, २. बिजली }

चाँदी:- कलधौत*, परिक{ खराब चाँदी, खोटी चाँदी (सुनार) }, दुरबरन ( दुर्वर्ण ), प्रजादान, महाशुभ्र, रंगबीज, रजत, रूपक, रूपा ( तत्सम-रुप्य ), रूप्य, रौप्य, रौष्य, लोहराजक,  वह्निभूतिक, हंसाभिख्य, सुबड़ा ( टलही चाँदी, ताँबा मिली हुई चाँदी ), करवल ( जस्ता मिली हुई चाँदी ), तारकूट- तार { (=चाँदी) + कूट(=नकली) चाँदी और पीतल के योग से बनी एक धातु } #कलधौत ( १. चाँदी २. सोना )
#कालधौत - चाँदी या सोने का

चोर:- आखनिक*, आमोषी ( आमोषिन् ), कुम्भिल, कुसुमाल, खनक, खनिल, डाकू,  तस्कर, दस्यु, दस्र, परिमोषी (परिमोषिन्), बटमार, भड़िहा, मोषक, मुमुपिपु, रजनीचर, रिक्वा ( रिक्वन् ), रिभ्वा ( रिभ्वन् ), लुटेरा, वन्दिचौर, विलोड़क, विलोप्ता ( विलोप्तृ ), विहर्ता ( विहर्तृ ), सारिक, साहसिक, स्तैन्य, हरिक, हैरिक ...
#आखनिक ( १. खनक, २. चूहा, ३. शूकर, ४. चोर, ५. कुदाल )...
#दस्र {१. शिशिर ऋतु, २. गदहा, ३. अश्विनी- कुमार, ४. दो का समूह, जोडा़, ५. दस्यु, लुटेरा, ६. अश्विनी नक्षत्र, ( यौ॰—दस्र देवता = अश्विनी नक्षत्र; दस्रसू = सूर्य की स्त्री ), ७. दोहरा, ८. हिंसा करनेवाला }

चोटी:- चुंदी, चुटिया, चुरकी, तुंग, परकोटि, शिखर, शिखा, शिखापाश, शिरोबिंदु, शीश, शृंग, सानु

छाती:- उर, उरस्थल, वक्ष, वक्षप्रांत, वक्ष:स्थल, सीना, हृदयस्थान, हृदयस्थल, हृदयस्थान, स्तन* चूचुक*, हृदय, मन, चित्त, साहस*, हिम्मत*, उदस्थल (❓),
#छाती- छादिन्  { (= आच्छादन करनेवाला ) / छादी  - (छादक, आवरणकारी, आच्छादन करनेवाला) }

जनार्दन:- विष्णु ( ☝️ ), कृष्ण ( ☝️ )

जमुना:- अंशुसुता ( अंशु — १. किरण, २. सूर्य✔ ३. वस्त्र), अर्कजा*, कालगंगा ( वह गंगा जिसका रंग काला हो; अर्थात् यमुना नदी ), कालिन्दी ( कलिंद पर्वत से निकली हुई, यमुना नदी ), कृष्णा ( १. यमुना, २. द्रौपदी ), तरणितनूजा, तरणिसुता, तरणितनया, भानुजा, यमी, यमभगिनी, यमुना, रविजा, रवितनया, रविनन्दिनी, सूर्यतनया, सूर्यपुत्री, सूर्यसुता, हंससुता
#अर्कजा ( सूर्य की कन्या अर्थात् यमुना, ताप्ती )

जल:- अंभ*, अमृत, अम्बु, आप, आब, उदक, कीलाल*, जीवन, तोय, नीर, पय, पाथ*, पानी, पुष्कर*, मेघपुष्प, रस, वारि, सलिल, सलिल, अर्ण
#अंभ ( १. जल, २. आकाश, ३. पितृलोक )...
#कीलाल ( १. अमृत, २. जल, ३. शहद, मधु, ४. पशु , ५. बन्धन-मुक्त करनेवाला, ६. देवताओं का अमृत जैसा पेय पदार्थ, ७. रक्त ? )...
#पाथ ( १. जल, २. सूर्य, ३. अग्नि 🔥, ४. आकाश, ५. वायु, ६. अन्न )...
#पुष्कर  (१. जल, २. जलाशय, पोखरा, ३. कमल, ४. नीलकमल )

जीभ:- जबान, जिह्वा, मुखचीरी(?), रसना, रसनेंद्रिय, रसज्ञा*, रसिका, रसीका, रसग्रह, रसमातृका, चंचला, अंत:करण, जबान, आत्मा, रसला, लिसान(?), विखासा(?)
#रसज्ञा ( १. गंगा, २. जीभ )

जीव:- प्राणी, प्राण, चैतन्य, जीवन, प्राणधारी, देहधारी, देही, जीवधारी, जान

जंगल:- अटवी, अरण्य, कानन, कांतार, बयाबान, वन, विपिन, सहरा

जानकी:- अयोनिजा, जगज्जननी*, जनककिशोरी, जनकतनया, जनकनंदिनी, जनकसुता, जानकी, पार्थिवी*, पुण्यश्लोका* भूमिजा, भूमितनया, भूमिपुत्री, भूमिसंभवा ( भूमसम्भावा ), मैथिली, रमा, रामप्रिया, वैदेही, सीता
#जनक + (~सुता, ~तनया, ~नन्दिनी, ~आत्मजा, ~दुलारी...)
#जगत्-जननी = जगज्जननी { १. जगदंबा, २. परमेश्वरी, ३. सीता✔ }
#पार्थिवी { १. ( पृथ्वी से उत्पन्न ) सीता✔ २. उमा, पार्वती, ३. लक्ष्मी }
#पुण्यश्लोका ( १. सीता, २. द्रौपदी )

जगत्:- इहलोक, जग, जगती, जहान, दुनिया, भव, भुवन, मृत्युलोक, लोक, विश्व, संसार, सृष्टि
#दु:ख { ~ग्राम, ~लोक, ~सागर = संसार }

ज्वालामुखी 🌋 :- अग्निगर्भ, अग्निपर्वत

झण्डा:- अख्तर*, केतु, केतन, चिह्न*, ध्वज, ध्वजा, निशान, पताका, प्रतीनाह, फरहरा, वैजयंती , व्यजा
#अख्तर { १. तारा 👇, २. ध्वज , ३. भाग्य 🌠👇, प्रारब्ध, किस्मत 👉 मुहा॰—अख्तर चमकना = भाग्योदय होना, नसीब खुलना, अच्छे दिन आना }

झरना:- उत्स, चश्मा, जल-प्रपात, झर, झरी(स्त्री०), झर्झर, निर्झर, प्रपात, प्रस्रवण, सरि, सोता, स्रोत 


सोमवार, 24 सितंबर 2018

पर्यायवाची - “क-वर्ग”




कमल:-अरविंद, अम्भोज*, अब्ज, अंबुज, इंदीवर, उत्पल, कंज, कुमुद(लाल कमल), कुवलय, कुशेशय, कोकनद, राजीव, जलकरंक*, जलज, जलजात, जलरुह, पंकज, पंकरुह, पाथोज, पद्म, पुण्डरीक(श्वेत कमल), पुष्कर*, नलिन, नीरज, तामरस, वारिज, वारिजात, शतदल, शतपत्र, सरसिज, सरोरुह, सरसीरुह, सरोज, सारंग*
#जलकरंक ( १. कमल, २. नारियल 🌴, ३. तरंग, लहर )
#अंभोज ( १. कमल, २ कपूर, ३. चन्द्रमा, ४. शंख )...
#पुष्कर  (१. जल, २. जलाशय, पोखरा, ३. कमल, ४. नीलकमल )
#सारंग ( १. रंगीन, २. सुन्दर, सुहावना, ३. रसीला, सरस )
#सारंग ( १. दीपक, २. सूर्य, ३. चंद्रमा, ४. आकाश, ५. बादल, ६. बिजली, ७. समुद्र, ८. तालाब, ९. पानी, १०. शंख, ११. मोती, १२. कमल✔, १३. हाथी 🐘, १४. घोड़ा 🐎, १५. शेर 🦁, १६. हिरन, १७. साँप 🐍, १८. सारंग नामक धनुष, १९. सारंग मक्खी, २०. स्वर्ण, २१. कर्पूर, २२. शिव, २२. कामदेव, २३. कोयल, २४. मोर, २५. हंस, २६. बाज़, २७ चातक, २८. भौंरा )

कपड़ा:- कर्पट( तत्सम्), अंशुक, अम्बर, चीर, दुकूल, परिधान, पहरावा, पट, पोशाक, लिबास, वस्त्र, वसन, सिचय, आच्छाद, गणवेश, लुग्गा, लैकुची, परीरणा 
#परिपीणा ( १. वस्त्र, परिधान, कपड़ा, २. कच्छप, कछुआ, ३. छड़ी, डंडा )

कल्पवृक्ष:- अजरद्रुम, कल्पतरु, कल्पशाल, कल्पद्रुम, कल्पविटप, कामतरु, तरुराज, देवद्रुम, देववृक्ष, पारिजात, मन्दार / मंदारक*, विबुधतरु, सुरतरुवर, सुरविटप, सुरतरु, सुरद्रुम, सुरशाखी(तत्सम्-सुरशाखिन्), हरिचन्दन... 
#मंदारक ( १. मदार, आक, २. एक देववृक्ष )
#पंचवृक्ष /पञ्चवृक्ष पाँच देववृक्ष जिनके नाम हैं— मंदार, पारिजात, संतान, कल्पवृक्ष और हरिचंदन

कन्या:- अक्षता(कुमारी), अनन्यपूर्वा*, अनागतातर्तवा*, अपूर्वपति*, अविवाहिता, अनूढ़ा, अप्रत्ता*, अप्रौढ़ा, कनीनिका*, कन्यका, कन्यिका(❓), कुमारी, कुमारिका, कुँआरि, कुँआरी, किशोरी, टिमिली*, बच्ची, बाला, बालिका, दारिका*,दायादी*, दायादा*, द्रुही*, दुख्तर(फा०), दुहिता(❓), देहसंचारिणी*, धेरिया*, लड़की*, लली*
#अनागतातर्तवा { कुमारी, गोरी, बालिका, जो कन्या रजोधर्मिणी न हुई हो, अजातरस्का }
#अनन्यपूर्वा { १. जो पहले किसी की न रही हो, २. कुमारी, क्वारी }
#अपूर्वपति { कन्या जिसका विवाह न हुआ हो }
#अप्रत्ता { कुमारी, कन्या जीसका विवाह न हुआ हो }
#कनीनिका✔ (कनीनका ?) { १. कुमारी, कन्या, २. आँखों की पुतली, ३. कानी उँगली }
@कनीक { १. युवा, २. व्यस्क }
@कनीनक { १. किशोर, २. आँख का तारा }
@कनीज़ { दासी, लौंडी, बाँदी }
#टिमिली { लड़की, छोकरी }
@टिमिला { लड़का, छोकरा }
#दारिका { १. कुँवारी लड़की, कुमारी, २. पुत्री, बेटी }
@दारिका (~सुन्दरी = असंभोगित वेश्या की कन्या)
@दारक { १. पुत्र, २. बालक }
@दाय { १. दान, २. देने योग्य धन, ३. दायज़ा, दहेज✔ ४. बँटवारे में मिला धन, पैतृक संपत्ति, उत्तराधिकार ५. दिये जाने योग्य, ६. जिसे दिया जाना आवश्यक हो, ७. दाई }
@दायाद { १. दाय का अधिकारी, उत्तराधिकारी, २. सपिंड संबंधी, ३. पुत्र, बेटा }
#दायादा / दायादी { १. कन्या✔, २. उत्तराधिकारिणी }
#द्रुही { कन्या } ...द्रुह { १. पुत्र, २. वृक्ष, ३. झील }
#सस्वेदा { वह कुमारी कन्या जिसका कौमार्य सद्यः भंग हुआ हो }
#दुहिता { पुत्री, बेटी }
#देहसंचारिणी { कन्या, लड़की }
#धेरिया { १. लड़की, २. पुत्री }
#लड़की { १. बालिका, २. पुत्री, बेटी }
#लली { १. लड़की के लिये प्यार का शब्द, २. दुलारी लड़की 👧, लाड़ली लड़की 👧, जैसे, वृषभानु लली, जनक लली, ३. नायिका के लिये प्यार का शब्द, प्रेयसी, प्रेमिका }
@लला { १. लाल, २. दुलारा लड़का, ३. लड़का, बालक, ४. प्रेमी का प्रेम संबोधन }

कबूतर:- कपोत(तत्सम्), परेवा, पारावत, रक्तलोचन, हारीत, रक्ताक्ष*, कलकंठ*
#रक्ताक्ष { १. लाल आँखों वाला ( १. चकोर, २. कबूतर, ३. सारस, ४. भैंसा ); २. डरावना } 
#कलकंठ { १. सुंदर कंठ ( १. कोयल, २. कबूतर, ३. हंस ); २. मधुर ध्वनि करनेवाला ( कोयल ) }

कटाक्ष:- व्यंग्य, छींटाकशी, ताना, तंज, बोली, चुटकी, उपहास, कटूक्ति, आक्षेप*, परोक्ष संकेत, उपहास, ताना, कटाक्ष

कटु:- कर्कश(तत्सम्-कार्कश्य), कड़वा, चरपरा, तीखा, तेज, तीक्ष्ण, परुष, कड़ा, रूक्ष, रूखा

कर:- शुल्क, महसूस, मालगुज़ारी 
कर:- हाथ,पाणि, हस्त

कामदेव:- अनंग, अदेह, अनन्यज, आत्मज*, आत्मजात*, आत्मभू*, ऋश्वकेतु, काम, कुसुमेष् , कुसमेषु, कुसुम-चाप, कुसुम-पंचक, कुसुम-बाण, कन्दर्प, कुसुमशर, कुसुमायुध, केतन, झषकेतु, झषांक, दर्पक, पंचशर, पुष्पधन्वा, प्रद्युम्न, पुष्पशायक, पंचबाण, ब्रहमसु, भव, मदन, मनोभव, मनोज, मार, मनसिज, मन्मथ, मनमथन, मीनकेतु, मीनकेतन, मयन(तत्सम्-मदन), मकरध्वज, रतिपति, रुद्रारि, वसंतसखा, शम्बरारि, सारंग, स्मर, स्मृतिजात, हृच्छय
#आत्मज = आत्मजात  { १. पुत्र, २. कामदेव, ३. अपने से उत्पन्न }
*{आत्मभू #१. अपने शरीर से उत्पन्न , २. आप ही आप उत्पन्न... आत्मभू #१. पुत्र , २. कामदेव , ३. ब्रह्मा , ४. विष्णु , ५. शिव}
*{कामवाण- कामदेव के पाँच बाण 🎯 १. मोहन, २. उन्मादन, ३. संतपन, ४. शोषण, ५. निष्चेष्टीकरण}
*विशेष #स्त्री पुरुष के संयोग की प्रेरणा करने वाला एक पौराणीक देवता जिसकी स्त्री रति, साथी बसंत, वाहन कोकिल, अस्त्र फूलों का धनुष बाण है । उसकी ध्वजा पर मीन और मकर का चिन्ह है ।

काक:- एकाक्ष, कौआ, काग, काण, वायस, पिशुन, करट

कारागार:- कारागृह, कारावास, बंदीगृह, जेल

कार्तिकेय:- अग्निकुमार, अग्निज, अग्निजन्मा, अग्निजात, अग्निभू, कुमार, षडानन, शरभव, स्कन्द, सिद्धसेन, शरेज, शरवनोद्भव, शिखिवाहन, भद्रशाख, बालचर्य, मयूरेश, मातृवत्सल, द्वादशलोचन, तारकजित्, शरभू, अग्निभू, कनकशक्ति, अग्निसुत, अग्निसूनु, तारकारि, द्वादशाक्ष, मयूररथ

किनारा:- तीर, तट, पुलिन, कूल, बेलातट, सिरा
किनारा:- छोर, सिरा, पर्यंत

किरण:- अर्चि, अंशु, कलाकेतु, कर, केतु(?), गो, त्विषि*, मरीचि, मयूख, रश्मि, केश(?), प्रभा, प्रकाशरश्मि, वीचि*(👇)
#त्विषि { १. किरण✔, २. शक्ति, ३. चमक, प्रभा, ४. ओज, तेज प्रताप }

किसान:- कृषक, काश्तकार, खेतिहर, हलधर*, जोतदार 
#हलधर - १. बलराम, २. कृषक

कुबेर:- कुवेर(तत्सम्), अलकेश, अलकाधिप, अलकेश्वर, किन्नरेश, धनद, धनाधिप, धनपति, धनेश, धनेश्वर, धनपाल, यक्षराज, यक्षपति, यक्षेंद्र, यज्ञ(?),  रत्नेश, रत्नाधिपति, श्रीद, राजराज, त्र्यम्बकसखा, गुह्यकेश्वर, मनुष्यधर्मा(तत्सम्-मनुष्यधर्मन्), वैश्रवण, नर- वाहन(?) , एकपिंग, पुण्यजनेश्वर, हर्यक्ष, ऐलविल

केवट:- कैवर्त, खेवट, झीमर, झीवर, धीवर, नाविक, मल्लाह, माँझी

कोयल:- अन्यपुष्ट*, कलकंठ, कलघोष, काकपाली*, कामांध, काकली- रव , कुहूख, कोकिल(तत्सम्), कोकिला, तामाभ्र, परपुष्ट*, परभृत*, पिक, वनप्रिय, वंचथ,  वसंतदूत(✔) / वसंतदूती(❓), मदनशलाका, मधुगायन, मधुकंठ, मधुघोष, रक्ताक्ष*, श्यामा, 
#{*अन्यपुष्ट( वह जिसका पोषण अन्य के द्वारा हो अर्थात् कोयल), *परपुष्ट, *काकपाली(ऐसा कहा जाता है कि कोयल अपने अंडों को सेने के लिये कौवों के घोसलों में अपने अण्डे रख देती है, जिसका पालन काक द्वारा अर्थात् काकपाली) , *परभृत ( अन्य द्वारा पालित या पोषित अर्थात् कोयल)}

कृष्ण:- कन्हैया, कंसारि, कुंजबिहारी, गिरिधर, गोपीनाथ, गोविन्द, गोपाल, दामोदर, देवकीनंदन, द्वारकाधीश, द्वारकानाथ, नंदकिशोर, नंदकुमार, नंदनंदन, नंदलाल, बनवारी, बनमाली (बनमालिन्), मुरलीधर, मोहन, माधव, मधुसूदन, मुरारि, मुकुंद, मदन-गोपाल  यदुनाथ, यदुपति, यदुनंदन, यशोदानंदन, राधारमण, वंशीधर, व्रजवल्लभ, वासुदेव, श्याम, हृषीकेश, क्षीरसायी(?), नारायण, चक्रपाणि, चक्रधर, हरि

कृष्णा:- द्रौपदी … यमुना

केश:- अलक*, कच, कुन्तल, गेसू*, चिकुर / चिंकुर*, चूड़ा*, चूल*, जुल्फ, पश्म, बाल, लट, शिरोरुह, स्तूप*
#केशव { १. लम्बे और सुंदर बालोंवाला, प्रशस्त केशवाला, २. विष्णु, ३. श्रीकृष्ण, ४. हिंदी के एक कवि जिनकी लिखी रामचंद्रिका है }
#अलक { १. माथे पर लटकते बाल, मस्तक के इधर उधर लटकते हुए मरोड़दार बाल , २. जुल्फ़, ३. घुंघराले बाल, ४. महावर(अलक्तक/अलक्त) }
#गेसू { १. जुल्फ, अलक, २. पीठ पर लटकनेवाले लंबे बाल, ३. केश, बाल }
#चिकुर / चिंकुर { १. सिर के बाल, केश, २. चंचल, चपल }
#चूड़ा { १. केश, २. शिखर, ३. सिर, ४. चोटी, शिखा, चुरकी, ५. चिउड़ा, चिड़वा, ६. बाहुभूषण, कंकण, कड़ा, वलय, ७. हाथों में पहनने के लिये छोटी बड़ी बहुत सी चूड़ियों का समूह }
#चूल { १. सिर के बाल, २. शिखा, चोटी }
#स्तूप { १. मिट्टी आदि का ढेर, अटाला, राशि, २. ऊँचा ढूह या टीला, ३. मिट्टी, ईंट, पत्थर आदि का बना ऊँचा ढूह या टीला जिसके नीचे भगवान् बुद्ध या किसी बौद्ध महात्मा की अस्थि, दाँत, केश या इसी प्रकार के अन्य स्मृति- चिह्न संरक्षित हों, ४. केशगुच्छ, लट✔, ५. मकान में का सबसे बड़ा शहतीर, जोता, ६. शवदाह के लिये क्रम से एकत्रित लकड़ियों का ढेर, चिता, ७. शक्ति, क्षमता }

कृतज्ञ:- आभारी, अनुग्रहीत, उपकृत, ऋणी, कृतार्थ, एहसानमंद, कृतकृत्य, गूर्ण, कृतवेदी(तत्सम्-कृतवेदिन्), धन्य, ममनून, शुक्रगुजार, शाकिर, स्वस्त्यक्षर, स्थूललक्ष

क्रोध 😡 :- अमर्ष, रोष, ग़ुस्सा, आवेश / आवेशन, कोप, तैश

खग:- पक्षी 🦆 ( ☝️ )

खम्भा:- स्कम्भ या स्तम्भ(तत्सम्), थंभ(तत्सम्-स्तम्भ), स्तूप*, सहारा, टेक, चाँड़, थूनी(तत्सम्-स्थूण), थम, थाम(तत्सम्-स्तम्भ), लाट(अशोक की लाट), मीनार( कुतुबमीनार की लाट), मस्तूल(?), शहतीर(?)

खंड:- अंश, अवयव, अंग, आंशिक, भाग, टुकड़ा, हिस्सा, खंडित, अपूर्ण, विभक्त, छोटा, लघु, कुछ, थोड़ा, अल्प

खल:- अधम, कुटिल, दुष्ट, दुर्जन(दुष्ट जन), धूर्त, नृशंस, नीच, बुरा, पामर, पाजी, शठ, क्रूर, अपकारी, अत्याचारी, जालिम, नष्टात्मा(तत्सम्-नष्टात्मन्), क्रुरट्टक, दुर्विध, लुच्चा, निर्लज्ज, बेहया, धोखेबाज़, फरेबी, चुगलखोर, बदमाश, निकृष्ट, अशिष्ट, असभ्य, हीन, तुच्छ, छली, चालबाज, खोटा, दुर्हृदय, दुराचारी, कमीना, चालाक

खग:- विहग, विहंग, पक्षी, पंछी, चिड़िया, परिंदा, नभचर, खेचर, शकुनि, द्विज, पखेरू, अंडज, पतंग, शकुनक, द्युग, अंबरचर, आकाशगामी, अंतरिक्षग, वातगामी(तत्सम्-वातगामिन्), वियग(विहग), संकुत, पतत्री(पतत्रिन्), पत्ररथ, पत्री, पतग

गंगा:- अमर्त्यापगा, अलकनंदा, जाह्नवी, त्रिपथा, त्रिपथगा, देवनदी, देवापगा, देवसरि, ध्रुवनंदा, नदीश्वरी, भागीरथी, मंदाकिनी, विष्णुपदी, सिद्धसरित्, सिद्धापगा, सुरसरि, सुरसरित्, सुरसरिता, सुरधुनी, स्वर्वापी

गज:- करी ( करिन् ), कुंभी ( कुंभिन् ), कुंजर, गयंद, गजेन्द्र, द्विरद, नाग, फील, बयंड ( बनेंद्र ), बनेंद्र, मतंग, वितुंड, वेतंड, रदी ( रदिन् ), सिवर, हस्ति ( हस्तिन ), हस्ती, हाथी ( हस्ती )

गणेश:- एकदन्त, गजानन, गणप, गणपति, गणाधि, गजवदन, गिरिजानन्दन, गौरीसुत, द्वियातृज, द्वैमातुर, द्विदेह, नागमुख, पृथ्वीगर्भ, भवानीनंदन, मोदकप्रिय, मूषक-वाहन, महाकाय, लम्बतुंड, लम्बोदर, वक्रतुण्ड, विनायक, विघ्नेश, विघ्ननाशक, विघ्नायक, विघ्नविनायक, विघ्नराज, विघ्नपति, विघ्नहरण, विघ्ननाशन, सिंधुरवदन, हेरम्ब 

गदहा:- उपक्रोष्टा, खर, गर्दभ, गधा, चक्रीवान, दशेरक, धूसर, बालेय, बेशर, भारग, रासभ, रेणुरूपित, वैशाखनंदन, वासत, वेशव, शंककर्ण, शीतलावाहन, शुद्धजंघ, हिमारा

गरुड़:- अमृताहरण, अरुणाग्रज, उरगाद, उरगारि, काश्यपि, किराताशी, खगेश, खगपति, खगेश्वर, गजकूर्माशी, नभगेश, नागान्तक, पन्नगारि, फन्नगाशन, पक्षिराज, पक्षीश्वर, रक्तपक्ष, विष्णुरथ, विष्णुवाहन, वज्रिजित्, वैनतेय, विहगेश्वर, विहगेश, सर्पारि, सुपर्ण, स्वर्णपक्ष, सुधाहृत, हरियान

गाय:- गौरी, गो, गौ, गऊ, गइया, तनू, धेनु, भद्रा, दोग्धी, सुरभि*, पयस्विनी, पीवरी*
#सुरभि ( १. गाय, २. पृथ्वी, ३. वसंत ऋतु )
#पीवरी ( १. युवती, स्त्री, २. गाय )

गुफा:- अद्रिकुक्षि, उल्ब, कंदरा, खोह, खान, खनि, गुहा, गह्वर, गिरिकंदर, गिरिकुहर, गर्ता, गर्त, गड्ढा, दरथ, पृथ्वीखात, पृथ्वीगृह, पाषाणसंधि, विलायन, भूमिगर्त, महाबलि, विवर, शैलरंघ्र, शिलावेश्म

गृह 🏡 :- अयनशाला, अवसथ*, आगार, आश्रम, आयतन, आवास, आलय, आशियाना, ओक, गेह, घर, धर्त्र*, धाम, निकेत, निकेतन, निलय, निवासस्थान, भवन, मकान, मंदिर, वासस्थान, शाला, सदन, स्थान,
#अवसथ ( १. घर, २. ग्राम, ३. विद्यालय, ४. छात्रावास )
#धर्त्र ( १. घर, गृह, २. सहारा, टेक, ३. पुण्य, नैतिकता )

गेह:- गृह ( ☝️ )

घड़ा:- घट, कुंभ, कलश, गगरा, गागर ( गर्गर ), गागरी, गगरी, गुड़शृंग, गलंतिका, निप, निबड़ा, भृंगारु, वार्धनी, मटका, मटकी

धिनौना:- अरुचिकर, खराब, गंदा, गर्हणीय, घटिया, घृण्य, घृणास्पद, घृणित, जुगुप्सित, दूषित, दोषयुक्त, निंदित, बुरा, भद्दा, वीभत्स

घुमक्कड़:- घुमंतू, घूमनेवाला, पर्यटक, भ्रमणकारी, भ्रमणशील, रमता, लड़ित, विचरणशील, विसंचारी, संचारी, सैलानी, स्वैरगत, यायावर, सदाभ्रम

धोड़ा:- अश्व 🐎 ( ☝️ )




पर्यायवाची - “स्वर”

‘अ’

अंक:- क्रमांक, नंबर, संख्या
अंक:- चिह्न, छाप, निशान
अंक:- अँकवार, क्रोड, गोद

अंकपाली:- दाई, धायी, धात्री, परिचारिका

अंकुर 🌱 :- अँखुआ, कलिका, कली, कल्ला, कोंपल, गाभ, डाभा 

अंकेक्षक:- अंकेक्षा, अक्षपटलिक, बहीखाता जाँचकर्ता, बही परीक्षक, लेखा परीक्षक, संपरीक्षक

अंकेक्षण:- बहीखाता जाँच, बही परीक्षा, लेखा-जाँच, लेखा-परीक्षा, संपरीक्षा, 

अंग:- अंश, खंड, टुकड़ा 
अंग:- अवयव, उपांश, घटक, भाग, शाखा, हिस्सा

अंगीकरण:- अंगीकार, अपनाना, ग्रहण, परिग्रह, स्वीकरण, स्वीकार, स्वीकृति

अँगूठी 💍:- अंगुलिका, छाप, मुँदरी, मुद्रा, मुद्रिका

अंचल:- अँचरा, आँचल, अंत, पल्ला, पल्लू
अंचल:- किनारा, छोर, सिरा
अंचल:- इलाक़ा, क्षेत्र, प्रदेश 

अंजन:- एण्टिमनी, कज्जल, काजर, काजल, दीपसुत, नेत्ररंजन, मषि, मषी, सुरमा

अंजर-पंजर:- कंकाल तंत्र, ठठरी, हड्डियों का ढाँचा 

अंजाम:- नतीजा, परिणाम, पूर्ति, फल, समाप्ति

अंजुमन:- जमाव, जलसा, महफ़िल, समारोह, सम्मेलन, सभा

अंटसंट:- अंडबंड, अनाप-सनाप, असंगत, ऊटपटाँग, निरर्थक, व्यर्थ 

अंत:करण:- अंतरात्मा, अंतर्घट, अंतर्मन, अंतश्चेतना, मन, हृदय

अंतःसलिला:- सरस्वती नदी

अंत:- आख़ीर, इति, ख़ात्मा, बस, समाप्ति
अंत:- अंचल ( 👆 )
अंत:- अंतगति, निधन, मरण, मृत्यु, मौत, स्वर्गवास 
अंत:- अंजाम ( 👆 )
अंत:- नाश, विनाश, प्रलय

अंत-क्रिया:- अंत-कर्म, अंत-गति, अंत्य-कर्म, अंत्य-क्रिया, अंत्येष्टि, अंत्येष्टि-कर्म, दाह-संस्कार, मृतक-कर्म, मृतक-क्रिया

अंतत:-  अंत में, अंततोगत्वा, अंतिम रूप से, आख़िरकार, आख़िर में, पीछे

अंतरंग:- अभिन्न, घनिष्ठ, पास, व्यक्तिगत, समीप

अंतर्धान:- अदृश्य, ओझल, ग़ायब, गुम, तिरोहित, लापता, लोप, लुप्त 

अंतर्निहित:- अंतर्जात, अंतर्निष्ठ, जन्मजात, निहित, शामिल, समाहित, सम्मिलित, सहज, सहजात 
अंतर्निहित:- अव्यक्त, गुप्त, निहित, प्रच्छन्न, समाहित, सुप्त

अंतर:- फ़र्क़, फ़ासला, भेद 

अंतरिम:- अल्पकालिक, अस्थायी, बीच का, मध्यवर्ती 

अंत्यज:- अंतिम वर्ण का, अंत्यजन्मा, अंत्यजाति, शूद्र
अंत्यज:- अछूत, अंत्यजन्मा, अंत्यजाति, अश्पृश्य, चांडाल

अंत्र:- अँतड़ी, आँत, आंत्र

अंदाज़:- अंदाज़ा, अटकल, अनुमान, आकलन, कूत, प्राक्कलन

अंदाज़न:- अनुमानतः, क़रीब-क़रीब, लगभग 

अंदु:- अंदुक, अंदू, नूपुर, पाजेब, पैंजनी, पायल 

अंधक:- अंधा, दृष्टिहीन, नेत्रहीन, सूर

अंधकार:- अँधेरा, अंधियारा, तम, तिमिर, तमस
अंधकार:- अज्ञ, अज्ञान, ज्ञानशून्य, ज्ञानहीन

अंधा:- अंधक, चक्षुहीन, दृष्टिहीन, नेत्रहीन, प्रज्ञाचक्षु, सूर, सूरदास

अंधेर:- अंधेरखाता, अनीति, अन्याय, धाँधली, नाइंसाफ़ी, बेइंसाफ़ी 

अंश:- अंग ( 👆 ), अवयव, खंड, टुकड़ा, भाग, हिस्सा

अकड़:- ऐंठ, गर्व, ढिठाई, घमंड, दंभ, दर्प, शेखी 

अकस्मात्:- अकस्मात्र, अचानक, अनायास, औचक, एकदम, तत्काल, तत्क्षण, सहसा

अकह:- अकथनीय, अनिर्वचनीय, अवर्णनीय

अकाज:- अड़चन, कार्यहानि, बाधा, विघ्न, बिगाड़, हर्ज

अकाट्य:- अकाट, दृढ़, मज़बूत 

अकाम ( तत्सम):- इच्छाहीन, कामहीन, कामना-रहित, कामना-हीन, निस्पृह
अकाम ( तद्भव ):- काम-रहित, निष्प्रयोजन, व्यर्थ

अकाय:- अशरीरी, देहहीन, शरीर-रहित

अकारण:- कारण-रहित, निष्प्रयोजन, बिना कारण, बेमतलब, बेवजह, व्यर्थ

अकारथ:- अकारत, अनुपयोगी, निष्फल, बेकार, लाभरहित, व्यर्थ 

अकाल:- अनाहार, दुर्भिक्ष, दुष्काल, भुखमरी, सूखा
अकाल:- अशुभ समय, असमय, कुकाल, कुसमय, बुरा समय, दुष्काल

अकादमिक:- अकादमी सम्बन्धी, विद्या-विषयक, विद्या-सम्बंधी, शैक्षणिक, शैक्षिक

अकिंचन:- कंगाल, गरीब, दरिद्र, दीन, निर्धन 

अकृषित:- अकर्षित, अकृष्ट, परती खेत

अकेतन:- खानाबदोश, बेघर, यायावर 

अकेला:- अनन्य, एकमात्र, एकाकी, केवल, तनहा

अक्रूर:- करुण हृदय, कोमल हृदय, दयालु, दयावान्, सहृदय, 

अक़्ल:- ज्ञान, बुद्धि, समझ

अक्षत:- अक्षुण्ण, अखंडित, अस्पृष्ट, पूरा, संपूर्ण, समूचा

अक्षम:- अशक्त, असमर्थ, क्षमताहीन, क्षमता-रहित, लाचार

अक्षय:- अक्षय्य, अखूट, क्षयहीन, क्षय-रहित, अनश्वर, अविनाशी

अक्षर:- मोक्ष, वर्ण, शिव, ब्रह्म, आत्मा, आकाश, नित्य, अविनाशी, अपरिवर्तनशील, अच्युत, स्थिर 

अक्षरजननी:- कलम, लेखनी

अक्षवार:- अखाड़ा, मल्लयुद्ध-स्थल, मल्लशाला, रंगभूमि, रंगशाला, व्यायामशाला 

अक्षुण्ण:- अक्षत ( 👆 ), अखंडित, पूरा, समूचा

अखंड:- अविभक्त, पूरा, पूर्ण, समग्र, समूचा, सम्पूर्ण, सारा
अखंड:- अबाधित, निर्बाध, निर्विघ्न, बाधारहित, व्यवधानरहित

अख़बार:- न्यूज़, पत्र, पत्रिका, पेपर, समाचार-पत्र

अखरोट:- अक्षोट, अक्षोड़

अखाड़ा:- अक्षवार ( 👆 )

अखिल:- निखिल, पूरा, पूर्ण, संपूर्ण, समग्र, समस्त, सारा, सार्व

अगज:- शिलाजीत, पर्वतीय जड़ी-बूटी, पर्वतीय औषधि, पहाड़ी औषधि 

अगजा:- पार्वती ( 👇 )

अगणित:- अगणनीय, अनगिनत, असंख्य, बेशुमार 

अगति:- दुरवस्था, दुर्गति, दुर्दशा, बुरी दशा

अगम:- अगम्य, अथाह, दुर्गम, दुर्बोध
अगम:- अचल, स्थावर { १. पर्वत 🏔👇, २. वृक्ष, पेड़ 🌳👇 }

अगला:- अग्र, अग्रगामी, अग्रवर्ती, आगामी, आनेवाला, भावी, सामने का

अगहन:- अग्रहायण, मार्गशीर्ष मास

अगाध:- अत्यंत गहरा, अथाह, अतल, अगाह 

अगुआ:- अगुवा, अग्रणी, अग्रगामी, नायक, नेता, नेतृत्वकर्ता, प्रधान, मार्गदर्शक, सरदार

अगोचर:- अप्रकट, अव्यक्त, अस्पष्ट, इंद्रियातीत

अग्नि 🔥:- अनल, आग, कषाकु, कृशानु, जातवेद(जातवेदस्), ज्वाला, ज्वलन, पावक, पाथ,  भास्वर, दहन, दव , धनञ्जय, धूमकेतु, रोहिताश्व, वायुसखा, वह्नि, वैश्वानर, शिखी, हुतासन, हुतभुक

अग्निकीट:- खद्योत, जुगनू

अग्निकुंड:- यज्ञवेदी, यज्ञकुंड, हवन कुंड, हवन वेदी

अग्रज:- अग्रजन्मा, बड़ा भाई

अघ:- अपवित्र, पाप, पातक

अघाना:- छकना, जी भरना, तृप्त होना, पेट भरना, संतुष्ट होना

अचल:- अडिग, अचल, अटल, अविचल, स्थिर, दृढ़, पक्का

अचरज:- अचंभा, आश्चर्य, विस्मय, हैरानी

अरण्य:- अटवी,कानन,कांतार,जंगल,वन,विपिन

अरविन्द:- कमल ( ☝️ )

अचल:- अद्रि, अडिग, अटल, अविचल, स्थिर, दृढ़, गिरि, नग, शैल, महीधर, पर्वत, पहाड़, भूधर, धराधर, भूभृत, तुंग

अचला:- अवनि, पृथ्वी, धरा, धरणी, वसुधा, वसुन्धरा, धरती, क्षिति, उर्वी, मेदिनी, मही, इला, भू,  जगती, भूमि, ज़मीन

अचेत:- चेतनाहीन, बेख़बर, बेहोश, मूर्च्छित, संज्ञाहीन

अच्छा:- आला, उमदा, घणा, चोखा, बढ़िया, भला

अच्छा:- उचित, उपयुक्त, ठीक, दुरुस्त, सही 

अच्युत:- अटल, स्थिर
अच्युत:- विष्णु ( 👆 ), परमात्मा

अच्युतांगज:- कामदेव ( 👆 ), मन्मथ

अजंभ:- मेंढक ( 👆 )

अजनबी:- अज्ञात, अनजान, अपरिचित, अपरिचित, ग़ैर, नावाक़िफ़ 

अजीब:- अजीब, अनूठा, अनोखा, अद्भुत, विचित्र, विलक्षण

अज्ञ:- अज्ञानी, अनजान, ज्ञानरहित, नादान, नासमझ, पागल, मूर्ख

अज्ञानी:- जड़, ज्ञानशून्य, अनजान, अनभिज्ञ, नादान, नासमझ, पागल, मूर्ख, मूढ़

अज्ञातश्मश्रु:- अल्पवय, अल्पायु, जिसकी दाढ़ी-मूँछ अभी न निकली हो

अटकना:- अड़ना, टिकना, ठहरना, रहना, रुकना

अटकल:- अनुमान, अंदाज, अंदाज़ा, कल्पना

अटकाव:- अड़चन, बाधा, प्रतिबंध, रुकावट, रोक, विघ्न

अटल:- अचल ( 👆 ), अडिग, दृढ़, ध्रुव, पक्का, स्थिर

अटारी:- अट्टा, अट्टालिका, ऊँचा भवन, कोठा, छत

अट्टहास:- कहकहा, खिलखिलाहट, ज़ोर की हँसी, ठहाका

अट्टालिका:- उत्तुंग भवन, ऊँचा भवन, बहुमंज़िला भवन, बहुमंज़िली कोठी / इमारत 

अठखेली:- क्रीड़ा, खिलवाड़, चुलबुलापन, चोंचला, मस्ती, विनोद

अड़ंगा:- अड़चन, अवरोध, बाधा, रुकावट, हस्तक्षेप 

अड़हुल 🌺:- गुड़हल, जपापुष्प, जवापुष्प

अणुभा:- बिजली ( 👇 )

अति:- बहुत, अधिक, ज़्यादा, विपुल

अतिकाय:- दीर्घकाय, बहुत हृष्ट-पुष्ट, बहुत लंबा-चौड़ा, मोटा, विशालकाय, स्थूलकाय

अतिक्रमण:- अतिक्रम, उल्लंघन, पार करना, मर्यादा का उल्लंघन, हद पार करना

अतिगति:- उत्तम गति, मुक्ति

अतिथि:- अभ्यागत, आगंतुक, गृहागत, पाहुना, मेहमान

अतिरिक्त:- अलावा, छोड़कर, न्यारा, फाजिल, फ़ालतू, सिवाय
अतिरिक्त:- अलग, जुदा, न्यारा, भिन्न, पृथक

अतिरेक:- अतिरेकता, अधिकता, अतिशयता, आधिक्य 

अतिवृष्टि ☔️ :- अतिवर्षण, अधिक वर्षा, अत्यधिक वर्षा 

अतिशय:- अत्यधिक, अधिक, बहुत अधिक, बेहद, बेहिसाब, बेशुमार

अतिशयोक्ति:- अतिशयोक्त, अतिरंजना, बड़बोलापन 

अतीत:- गत, गुज़रा हुआ, बीता हुआ, विगत, व्यतीत

अत्यंत:- अतिशय, अत्यधिक, असीम, बेहद, बहुत अधिक

अत्याचार:- अनाचार, ज़्यादती, दुराचार, दुराचरण, दुष्टता 

अथाह:- अगाध, अतल, अतिगहरा, बहुत गहरा, सीमा रहित

अदायगी:- चुनाव, चुकती, निपटाव, पटावट, बेबाकी, भुगतान

अदृश्य:- अंतर्धान, ओझल, ग़ायब, तिरोहित, लुप्त

अद्भुत:- अजीब, अनूठा, अनोखा, आश्चर्यजनक, विचित्र, विलक्षण

अद्वितीय:- अकेला, अतुल, अनुपम, अनूप, अनोखा, एकमात्र, बेजोड़

अधम:- निकृष्ट, निम्न, निर्लज्ज, नीच, पतित, पापी, पोच

अधिकता:- आधिकार, बहुतायत, बहुलता, बाहुल्य, प्रचुरता, प्राचुर्य

अधर्म:- पाप, अनाचार, अपकर्म, अनीति, अन्याय, अघ, पातक, गुनाह, कलुष

अनुपम:- अद्भुत, अनूठा, अपूर्व, अद्वितीय, अनोखा, अप्रतिम, अतुल, असदृश, निरुपम, बेजोड़

अपराध:- कसूर, किल्विष, जुर्म, दोष, पाप

अपराधी:- कसूरवार, किल्विषी, दंड्य, दोषी, पापी, मुजरिम, सदोष

अमृत:- अमिय, अमी, सुधा, सोम, सुरभोग, मधु, जीवनोदक,  पीयूष, 

अश्व:- घोड़ा, तुरंग, बाज, घोटक, हय, सैंधव, रविसुत, स्यंदन*
#बाज - घोड़ा 🐎
#बाज़ 🦅  - शिकारी पक्षी 
#स्यंदन - १. रथ, २. अश्व

अज:- अजन्मा, स्वयंभू, ब्रह्म, ईश्वर, आत्मा, जीवात्मा, बकरा, कामदेव, दशरथ के जनक

अन्वेषण:- गवेषण, खोज, जाँच, शोध, अनुसंधान,  ढूँढ़ , तलाश 

अभिजात्य:- कुलीन, श्रेष्ठ, आर्य, योग्य, विशिष्ट, संभ्रांत

अभिप्राय:- मंशा, तात्पर्य, आशय, उद्देश्य, प्रयोजन, मतलब, गरज, अर्थ, इरादा, नीयत, मूल अर्थ

अर्जुन:- अर्जुन के १० नाम - १. अर्जुन, २. कृष्ण, ३. किरीटी, ४. जिष्णु, ५. धनंजय, ६. फाल्गुनि, ७. विजय, ८. बीभत्सु, ९. श्वेतवाहन, १०. सव्यसाची। अन्य नाम - कृष्णसखा, कृष्णसरथि / कृष्णसारथि, कीशध्वज, कीशकेतु, पार्थ, पृथातनय, पृथाज, कौन्तेय, गुडाकेश, गांडीवधन्वा, गांडीवी, गांडीवधर, गांडीवधारी, चित्रयोधी, बृहनल्ला, परंतप, शिवमल्लक, सुभद्रेश, कर्णजित…


‘आ’

आकाश:- अंतरिक्ष, अनंत, अभ्र, अम्बर, अर्णव*, आसमान, गगन, नभ, व्योम, शून्य, तारापथ, पुष्कर(?), पाथ*, नाक(?), फलक, खगोल, दिव*
#दिव*  ( १. स्वर्ग, २. आकाश✔, ३. वन, ४. दिन, ५. नीलकंठ पक्षी )
#अर्णव ( १. समुद्र, २. अंतरिक्ष )
#पाथ ( १. जल, २. सूर्य, ३. अग्नि 🔥, ४. आकाश✔, ५. वायु, ६. अन्न )

आग:- अग्नि ( ☝️ )

आनंद:- सुख, चैन, प्रसन्नता, मोद, विनोद, प्रमोद, हर्ष, उल्लास, आह्लाद

आदित्य:- अजंभ, आदित:, अर्क*, उदथ(तत्सम-उदगीथ), कषाकु*, जगत्साक्षी, त्विषांपति(त्विषाम्पति)*, त्विषामोश*,  दिन, दिनकर, दिवा, दिवाकर, भानु, भास्कर, भास्वर*, सूर्य, सूरज, प्रभाकर, रवि, दिनेश, दिनमणि, मित्र, मार्तण्ड, सविता, पतंग*, पाथ*, तरणि, अंशुमाली, अंशुमान, मयूखमाली, अंशुहस्त, अंशुधर, अंशुपति, अंशुभर्ता, अंशुभृत्, अंशुत्वामी, केश(?), तमोहर*, हंस
#जातवेद ( जातवेदस् ) { १.अग्नि 🔥✔ २. सूर्य }
#अर्क (१. ज्योति, प्रकाश, किरण, २. सूर्य, ३. आक या मदार)
#कषाकु { १. सूर्य, २. अग्नि 🔥👆 }
#त्विषांपति { सूर्य }
#त्विषामोश { १. सूर्य, २. आक का पेड़ }
#पतंग { १. सूर्य✔, २. नाव👇, ३. टिड्डी(grasshopper), शलभ, ४. फतिंगा/पतिंगा(moth), ५. कनकौआ/कनकौवा, गुड्डी, पतंग (उड़ने वाली जो कागज़ की होती है) ६. गेंद, कंदुक, ७. पक्षी👇 }
#भास्वर { १. दिन, २. सूर्य✔, ३. अग्नि, कृशानु, ४. दीप्ति, ५. चमकदार }

आम:- आम्र, अंब, अमृतफल, सहकार, रसाल, पियम्बु, पिकबन्धु, फलश्रेष्ठ, मधुरासव, मधुद्रम*, पिकप्रिय, पिकवल्लभ, चूत, च्युत, अतिसौरभ
#मधुद्रम { १. महुआ, २. आम्र, आम्र का पेड़ }

आँख:- अंबक, लोचन, नयन, नेत्र, चक्षु, दृग, अक्ष, अक्षि, अम्बक, चख, दीदा, ईक्षण, विलोचन, प्रेक्षण

आँगन:- अँगना, अजिर, प्रांगण, सहन 
#अजिरा* -दुर्गा

आशीर्वाद:- आशीष, आशीर्वचन, मंगलकामना, शुभकामना

आदरणीय:- पूज्य, पूजनीय, भजनी, भट्टारक, मान्यवर, माननीय, सम्मान्य, सत्करणीय, सम्माननीय, अर्चनीय, वन्दनीय, वन्द्य, प्रणम्य 

आकाशगंगा:- स्वर्गनदी, सुरनदी, मन्दाकिनी, नभोनदी, नभगंगा ,सुरदीर्धिका, सुरनिर्झरिणी, गगनापगा, नभःसरित्, आकाशनदी, कहकशाँ, खापगा, आकाशगा, दिव्यसरिता/ दिव्यसरित्, अभ्रगंगा, वियदगङ्गा, सुरस्त्रवंती/ सुरस्तरवन्ती, व्योमगंगा, स्वरापगा

आँसू:- अश्रु, नेत्रनीर, नयनजल, नेत्रजल, नेत्रवारि, नयननीर

आपत्ति:- आपदा, मुसीबत, विपदा, आफत, विपत्ति, दु:ख, क्लेश, विध्न
आपत्ति:- एतराज, उज्र, विरोध, नुक्ताचीनी
#आपत्ति ( १. दुःख, क्लेश, विघ्न; २. विपत्ति, संकट, आफत, ३. कष्ट का समय, ४. जीविकाकष्ट, ५. दोषारोपण, ६. उज्र, एतराज, विरोध )

आडम्बर:- ढोंग, ढकोसला, पाखंड, प्रपंच, दिखावा, ऊपरी बनावट, तड़क-भड़क, टीम-टाम, झूठा-आयोजन

आशय:- प्रयोजन, उद्देश्य, अर्थ, अभिप्राय, तात्पर्य, मतलब, सारांश 
#आशय - { १. ठहरने की जगह ( जलाशय ), २. घर, ३. आश्रय, ४. मन, चित्त, हृदय, ५. प्रयोजन, उद्देश्य }

आत्मा:- अक्ष, जीवप्रभा, जीवनप्रभा, जीवात्मा, चेतन तत्त्व, परम तत्त्व, हंस

आहार:- भोजन, खाद्य-पदार्थ, खाद्य-सामग्री, खाना, भक्ष्य-पदार्थ, अशन
#अशनि - १. बिजली ⚡️, गाज, २. अस्त्र 


‘इ’

इच्छा:- अभिलाषा, आकांक्षा, उत्कंठा, कामना, लालसा, वाञ्छा, रुचि, तृष्णा, मनोरथ, चाह, मर्जी, स्पृहा, लिप्सा, ख्वाहिश, तमन्ना

इंद्र:- सुरपति, शचीपति, शतमख*, मधवा, शक्र, पुरन्दर, कौशिक, देवराज, देवेन्द्र, अमरपति, मेघपति, सुरेन्द्र, सुरेश, सुरेश्वर, सहस्राक्ष, पर्जन्य, पुरहुत, विबुधेश, वज्रधर, वासव, विडौजा, देवेश, वृत्तहन, शतॠतु, जिष्णु 
#जिष्णु* {१. विष्णु, २. इंद्र, ३. अर्जुन, ४. सूर्य, ५. वस्तु }
#शतमख { १. इंद्र, २. उल्लू } 

इन्द्राणी:- इन्द्रवधू, इन्द्रा, शची, पुलोमजा, मधवानी, ऐंद्री, शतावरी, शक्राणी, पुलोमपुत्री, शाक्री, शक्रपत्नी, मघोनी, इंद्रपत्नी, इंद्रशक्ति, चारुधारा, पूतक्रतायी, श्वेतौही, सुरेंद्रवती, चारुरावा 

इंद्रपुरी:- देवपुरी, अमरावती, इन्द्रलोक, देवेन्द्रपुरी, सुरपुर, पूषाभासा, वस्वौकसारा, देवधानी, अमरलोक, स्वर्ग, मंदार


‘ई’

ईश्वर:- अंतर्यामी, अखिलात्मा, अखिलेश, अखिलेश्वर, अज, अधिष्ठाता, कालात्मा, कालाध्यक्ष, दीनानाथ*, भगवान्, भवेश, परमेश्वर, परमात्मा, प्रभु, दीनानाथ, ईश, जगदात्मा, जगदाधार, जगदीश, जगदीश्वर, जगत्प्रभु, जगत्प्राण, जगद्धाता, जतन्नियंता, जगदीश, जगन्नाथ, ब्रह्म, नरोत्तम*, सर्वात्मा 
#दीनानाथ ( १. दुखियों का सहायक, २. परमात्मा, ईश्वर )
#नरोत्तम ( १. मनुष्यों में श्रेष्ठ, २. ईश्वर, परमात्मा )

ईमानदारी:- निष्कपटता, निश्छलता, सत्यनिष्ठा, सदाशयता, दयानतदारी, सच्चाई, नेकनीयती, (निष्कैतव=ईमानदार), (शुद्धधी=ईमानदार), वफादारी, रास्तबाजी, अकल्कता 

ईर्ष्या:- मत्सर, डाह, जलन, कुढ़न, द्वेष, स्पर्धा, चिढ़, हसद

ईख:- गन्ना, ऊख, रसडण्ड, रसाल, रसद, पैंडी (?...पैंड़ी/ पैड़ी/पैडी), कर्कश, मधुतृण, मधुरस*
#मधुरस ( १. मीठा, २. ईख )


‘उ’

उत्कर्ष:- उन्नति(👇), उन्मेष, उत्थान, अभ्युदय, आरोह, चढ़ाव, उत्क्रमण, उठाव, प्रगति, तरक्की, विकास, बढ़ती, समृद्धि 
{ उन्मेष# १. खुलना (आँख का), २. विकास, खिलना ( उ॰—समस्त चराचर में सामान्य हृदय की अनूभूति का जैसा तीव्र और पूर्ण उन्मेष करुणा में होता है वैसा किसी और भाव में नहीं।—चिंतामणि, भाग २, पृ॰ ५७ ) ३. थोड़ा प्रकाश, थोड़ी रोशनी } 

उन्नति:- वृद्धि, समृद्धि, तरक्की, बढ़ती, प्रगति, उत्थान, उत्कर्ष (👆), विकास

उजाड़:-निर्जन, वीरान, जनशून्य, बयाबान, बियाबान, सुनसान, बरबाद, ध्वस्त, खण्डहर, उच्छिन्न*
#उच्छिन्न ( १. कटा हुआ, खंडित; २. उखाड़ा हुआ )
{उज्जवाल(सं०)-उत् + जड़ या जर अथवा उज्ज्वाल > उजार > उजाड़ु } 

उपवास:- निराहार, व्रत, अनशन, फ़ाका, लंघन, बुभुक्षित, भूखा 

उपासना:- आराधना, भक्ति, पूजा, अर्चना, इबादत, सेवा*
(टहल - सेवा*, शुश्रूषा, खिदमत)
(परिचर्या - १. सेवा*, टहल, खिदमद; २. रोगी की सेवा शुश्रूषा )

उत्साह:- जोश, उमंग, हौसला, साहस, उबाल 

उत्सुक:- व्यग्र, आतुर, उत्कंठित, रुझान, रुचि,आतुर, अधीर, आकुल, बेचैन, लालायित, इच्छुक, ( व्याकुल, उद्विग्न )

उपालंभ:- उलाहना, उलाहना, गिला, शिकवा, शिकायत

उल्लू 🦉 :- उलूक, कणाद* कुधि, कुलाल*,  द्युक, काकभीरू, वायसान्तक, उरुवा, रुरुआ, लक्ष्मीवाहन, कौशिक, कुचकुचवा, दीहंध*, तमचर ( तमीचर ), शतमख*
उल्लू :- निर्बुद्धि, बेवकूफ, मूर्ख, गधा 
#तमचर ( १. निशाचर, २. उलूक )
#दीहंध ( वह जो दिन में देख न सके = उलूक )
#कणाद ( १. वैशेषिक दर्शन के रचयिता एक मुनि, उलूक मुनि, २. सुनार, ३. उल्लू ✔)
#कुलाल (१. उल्लू✔, २. कुम्हार ३. बनमुरगा )
#शतमख ( १. इंद्र, २. उल्लू ✔)


‘ऊ’

ऊँट 🐪 :- लम्बोष्ठ / लम्बौष्ट, महाग्रीव, उष्ट्र, क्रमेलक, वक्रग्रीव, मरुस्थल-जहाज़ 

ऊँघ:- तंद्रा*, ऊँघाई, झपकी, अर्घनिद्रा, अलसाई, निद्रागम, उनींदा ( उन्निद्र - तत्सम ), विनिद्र, अनिद्र
#तंद्रा-थकित, क्लांत, सुस्त

ऊधम:- उद्धम ( तत्सम), उपद्रव, हुल्लड़, हंगामा, धमाचौकड़ी, उत्पात, हल्ला-गुल्ला, शोरगुल, धूम, दंगा-फसाद, दंगा, धक्का-मुक्की, हलचल

ऊँचा:- उच्च, ऊर्ध्व, ऊपर, उन्नत, उत्तुंग, तुंग, बुलंद, शीर्षस्थ

ऊसर:- अनुर्वर, अनुपजाऊ, सस्यहीन, टापड़


‘ऋ’

ऋद्धि:- समृद्धि, सम्पन्नता, वृद्धि, बढ़ती, बढ़ोत्तरी, श्री, लक्ष्मी, सफलता, गौरव, सिद्धि
#ऋद्धि नामक औषधि -प्राणप्रदा 
#ऋद्धि-सिद्धि ( १. धन-सम्पत्ति व सफलता, २. हर तरह की सफलता )

ऋषि:- मन्त्रद्रष्टा, संत, मुनि, मनीषी, साधु, महात्मा, मन्त्रकार(?) 


‘ए’

एकता:- एकरूपता, एकसूत्रता, ऐक्य, अभिन्नता, अभेद, एका, मेलजोल, इत्तिहाद

एकांत:- सुनसान, शून्य, सूना, निर्जन, विजन ( वैजन्य - तत्सम ), शान्त, निर्मक्षिक, सुनिभृत

एकाएक:- अकस्मात्, अचानक, सहसा, एकदम, अनायास, एकबारगी, यकायक, तत्क्षण, तत्काल, बैठे-बिठाए, औचक, अतर्कित, अनचित्ते में, अपंभावित ( ? ), आकस्मिक, यकबयक, औचट में, दैवात्, हठात्, अचिंतित
#अपंभावित ( १. आकस्मिक, २. निश्चिंत, ३. बैफिक्र )

एहसान:- अनुग्रह, कृतज्ञता, आभार, उपकार, भलाई, नेकी, कृपा, दया, अनुकंपा, निहोरा, 


‘ऐ’

ऐच्छिक:- स्वेच्छाकृत, वैकल्पिक, अख्तियारी, सविकल्प, मनचाहा, पसंद का, स्वैच्छिक

ऐश्वर्य:- वैभव, संपन्नता, समृद्धि, धन, सम्पत्ति, ऋद्धि, श्री, सम्पदा, धन-सम्पत्ति, विभव, विभूति, धन-दौलत, दौलत, भूमा*, हशमत*
#भूमा { (भूमन्) १. अधिकता, बहुत्व, विशालता, प्रचुरता, २. ऐश्वर्य✔, संपत्ति, ३. विराट् पुरुष, ब्रह्म, ४. धरती, पृथ्वी }
#हशमत { १. गौरव, बड़ाई, २. ऐश्वर्य✔ , वैभव }


‘ओ’

ओस:- तुषार, हिमकण, हिमसीकर, हिमबिन्दु, तुहिनकण, खजल*, आकाशसलिल*, रजनीजल*, अन्तरिक्षजल, निशाजल*, शबनम, खवाष्प, रात्रिजल, (अवश्याय/अदश्याय= ओस का तत्सम्...?)
#खजल ( १. ओस, २. वर्षा, ३. कोहरा )
#आकाशसलिल ( १. वृष्टि, २. ओस )
#रजनीजल ( १. ओस, २. पाला )
#निशाजल ( १. हिम, पाला, २. ओस ) 

ओंठ:- ओष्ठ, अधर⬇(नीचे  का ओंठ)...सधर ⬆(ऊपर का ओंठ), होंठ, लब, दंतच्छद, रदनच्छद, दन्तवस्त्र, रदपट, शफह, 
{विशेष — अधर - १. अंतरिक्ष, २. ओंठ }

ओझल:- अंतर्धान, अदृश्य, लुप्त, गायब, तिरोहित, अलख, अदर्शन, छिपाव, गोपन, निगूहन, तिरोभाव, दुराव, लोप

ओढ़नी:- अंगवस्त्र, अंशुक, उत्तरीय, चुनरी, चुन्नी, चादर, दुपट्टा, स्यालू 

‘औ’

और:- एवं, एवम् ( मूल शब्द ), तथा, साथ ही, व
और:- अधिक, ज्यादा, बड़कर

औषधि:- भेषज, ओषधि / औषधि / ओषधी, दवा, दवाई, औषध, दवा-दारू, जड़ी-बूटी