#ध्वान्त { १. ~चर=रक्षस, निशाचर, २. ~शत्रु/शात्रव=सूर्य, अग्नि, चन्द्रमा, श्वेत वर्ण, ३. ~राति/रात्ति=ध्वान्तशत्रु, ४.~उन्मेष =ध्वान्तोन्मेष= जुगनू/खद्योत , ४. ~वित्त=जुगनू/खद्योत }
तरंग:- उत्कलिका*, ऊर्मि, उल्लोल, कल्लोल*, जलकरंक*, जललता, भंग (❓), भृण्डि, भृंमि, मौज*, लहर, वीचि*, हिलकोर / हिलकोरा, हिलोर(स्त्री० ✔), हिलोरा(पु०), हिल्लोल
#उत्कलिका { १. उत्कंठा, २. फूल की कली, ३. तरंग, लहर, ४. वह गद्य जिसमें बड़े बड़े समासवाले पद हों }
#कल्लोल { १. लहर, जल की तरंग, २. मन की लहर, मौज, ३. क्रीड़ा ...कल्लोलित = तरंगित, कल्लोलिनी👇 = नदी }
#मौज { १. तरंग, हिलोर २. उमंग, सुख, आनंद 😂 }
#वीचि { १. लहर, तरंग २. बीच की खाली जगह, अवकाश ३. चमक, दीप्ति ४. किरण*👆 }
#जलकरंक { १. कमल 👆 २. नारियल ३. तरंग, लहर ४. शंख }
तालाब:- तटाक, तड़ाग(तत्सम), कासार, जलाशय, जल्ला, झील, ताल, दह*, पद्माकर, पुष्कर*, पोखर ( तत्सम-पुष्कर ), बावली, सर*, सरसी, सरोवर, ह्रद*(✔), हृद(❌)
#दह-(तत्सम द्रह) {१. नदी में वह स्थान जहाँ पानी बहुत गहरा हो,नदी के भीतर का गड्ढा, पानी के कटाव से कुआँ, नदी आदि के किनारे पर भोतर की ओर बननेवाला खोखला स्थान - यौ॰—कालीदह; २. कुंड, हौज; ३. दह- [सं॰ दहन] ज्वाला, लपट, लौ ४. दह- [फा़॰] दस }
#द्रह { १. ह्रद, ताल, झील, २. वह स्थान जहाँ गहरा जल हो, दह* }
#पुष्कर { १. जलाशय, पोखरा २. जल ३. कमल ४. नीलकमल ५. एक तीर्थ जो अजमेर के पास है }
#पुष्कल { १. बहुत, प्रचुर २. परिपूर्ण, पर्याप्त ३. श्रेष्ठ, उत्तम ४. भिक्षा ५. एक प्रकार की वीणा ६. राम के भाई भरत के दो पुत्रों में से एक }
#सर { १. तालाब २. बाण 🎯 }
#शर { १. बाण 🎯, तीर 🎯 ३. बरछी या भाले का फल 🍎👈 ये वाला फल नहीं, नोंक 😅 }
#ह्रद { १. गहरा जलाशय २. गहरी झील }
#ह्रदिनी { नदी, सरिता 👇, बिजली/चपला👆 }
#हृद { हृदय , दिल 💘 }
तोता:- कीर, दाड़िमप्रिय*, मियाँमिट्ठू, मिट्ठू, रक्ततुण्ड, शुक, सुआ, सुग्गा, सुवा,
#दाड़िम { = अनार }
#सुआ / सुग्गा / सुवा { तत्सम- शुक }
तूफान:- अंधड़, अंधबाव, अंधप्रभंजन, अंधबाई ( अंधवायु ), आँधी, करीषंकषा, चक्रवात, झंझा, झंझावात, झंझानिल, प्रभंजन, बगूला, बवंडर, महावात, वातचक्र
तेजस्वी:- कांतिमय, कांतिमान्, कांतियुक्त, कांतिवान, तेजवंत, तेजमान्, तेजवान्, तेजवाला, तेजिष्ठ, तेजोमय, तेजोवान्, प्रतापी, प्रतापवाला, प्रभावान्, प्रभावशाली, बलवान, वर्चस्वी, वीर्यवान, शक्तिशाली, इकबालमंद*
#तेजस्वी { तत्सम-तेजस्विन् , तेजस्विनी-स्त्री॰ }
#कांति { ~ मय, ~ मान्, ~युक्त, ~वान }
#तेज { ~वंत, ~मान्, ~वान, ~वाला }
#तेजो / तेजस् { ~मय, ~वान् }
तलवार:- तरवारि ( तत्सम ), असि, ऋष्टि, कृपाण, करवाल, कौक्षेयक, खंग, खड्ग, चंद्रहास, तेग, तीक्ष्णधार, निस्त्रिंश, रिष्टि, विशसन, श्रीगर्भ, शमशीर, शमशेर(✔), शैफ़
#शमशेर { वह हथियार जो शेर की पूँछ अथवा नख के समान हो अर्थात तलवार, खड्ग आदि }
तरुण:- कनीन, कनीनक, जवान, तारुण, नवजवान / नौजवान, नवयुवक, नवयौवन, नवशोभ, मनोज्ञ, युवक, युवा, युवान, शर्कुर
तरुणी:- काहली*, किशोरी, तरुणा, धनीका*, दिक्करी*, नवयुवती, नवयौवना, नवेली, प्रमदा, मनोज्ञा, फतात, युवती, यौवनवती, रमणी, सुन्दरी
#काहिल=आलसी
#धनीका { १. पत्नी, वधू, २. प्रेमिका, ३. युवती, तरुणी }
#दिक्करी { १. तरुणी, जवान, २. (दिक्करिन्) आठो दिशाओं के ऐरावत आदि आठ हाथी- दिग्गज }
#कनीक { १. युवा, २. व्यस्क}...कनीज़ { दासी, लौंडी, बांदी }...कनीनक { १. किशोर, २. आँख का तारा }...कनीनिका { १. आँख का तारा, २. कन्या, ३. कानी उँगली }
थोथा:- अंतःसारशून्य, खोखला, खाली, छूछा, तत्त्वहीन, निष्फल, पोला, निःसार, बिहीन, रिक्त, रीता, रहित, व्यर्थ, शून्य, सारहीन, सुक्ख
थोड़ा:- स्तोक ( तत्सम ) , अल्प, कम, कुछ, किंचित्, ज़रा, ज़रा सा, टुक ( स्तोक ), तनिक( तनु ), तनु, न्यून, परिमित, रंच, रंचमात्र
थकान:- क्लांति, थकन, थकावट, थकाहट, श्रांति, शिथिलता, शैथिल्य
दुर्गा:- अजिरा*, अपराजिता*, अभया, आदि शक्ति, आद्या, ईश्वरी*, कल्याणी, कालिका, कामाक्षी, कामाख्या, कुमारी, चंडा, चंडालिका, चंडिका, चंडी, जगज्जननी, जगदंबा, जगद्गौरी, जगद्धात्री, जगन्नामाता, नंदा*, नंदिनी*, नारायणी, परमेश्वरी, पार्वती(👇), भगवती, भवानी, भार्गवी*, ब्रह्माणी, रुद्राणी, महादेवी*, महामाया, मीनाक्षी, मृडा, मृडानी, शक्ति, सिंहवाहिनी, सुभद्रा, सुरेशी, सर्वमंगला*, ललिता…
नवदुर्गा - १. शैलपुत्री, २. ब्रह्मचारिणी, ३. चन्द्रघण्टा, ४. कूष्माण्डा, ५. स्कन्दमाता, ६. कात्यायनी, ७. कालरात्रि, ८. महागौरी, ९. सिद्धिदात्री।
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति. चतुर्थकम्।।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति.महागौरीति चाष्टमम्।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना:।।
दुर्गाबत्तीसनाममाला ( दुर्गाद्वात्रिंशन्नामाला ) - १. दुर्गा, २. दुर्गार्तिशमनी, ३. दुर्गाद्विनिवारिणी, ४. दुर्गमच्छेदिनी, ५. दुर्गसाधिनी, ६. दुर्गनाशिनी, ७. दुर्गतोद्धारिणी, ८. दुर्गनिहन्त्री, ९. दुर्गमापहा, १०. दुर्गमज्ञानदा, ११. दुर्गदैत्यलोकदवानला, १२. दुर्गमा, १३. दुर्गमालोका, १४. दुर्गमात्मस्वरूपिणी, १५. दुर्गमार्गप्रदा, १६. दुर्गमविद्या, १७. दुर्गमाश्रिता, १८. दुर्गमज्ञानसंस्थाना, १९. दुर्गमध्यानभासिनी, २०. दुर्गमोहा, २१. दुर्गमगा, २२. दुर्गमार्थस्वरूपिणी, २३. दुर्गमासुरसंहन्त्री, २४. दुर्गमायुधधारिणी, २५. दुर्गमांगी, २६. दुर्गमता, २७ दुर्गम्या, २८. दुर्गमेश्वरी, २९. दुर्गभीमा, ३०, दुर्गभामा, ३१. दुर्गभा, ३२. दुर्गदारिणी।
#अजिरा { १. दुर्गा, २. वेगवती नदी }दुर्गा दुर्गार्तिशमनी दुर्गाद्विनिवारिणी!
दुर्गमच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी !!
दुर्गतोद्धारिणी दुर्गनिहन्त्री दुर्गमापहा !
दुर्गमज्ञानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला !!
दुर्गमा दुर्गमालोका दुर्गमात्मस्वरूपिणी!
दुर्गमार्गप्रदा दुर्गमविद्या दुर्गमाश्रिता !!
दुर्गमज्ञानसंस्थाना दुर्गमध्यानभासिनी !
दुर्गमोहा दुर्गमगा दुर्गमार्थस्वरूपिणी !!
दुर्गमासुरसंहन्त्री दुर्गमायुधधारिणी!
दुर्गमांगी दुर्गमता दुर्गम्या दुर्गमेश्वरी !!
दुर्गभीमा दुर्गभामा दुर्गभा दुर्गदारिणी !
नामावलिमीमां यस्तु दुर्गाया मम मानव:!!
पठेत सर्वभयान्मुक्तो भविष्यति न संशय:!!
#अजिर { १. आँगन, २. शरीर, ३. वायु, ४. इंद्रियविषय}
#अजर { १. नाशरहित, क्षयरहित, २. जो बूढ़ा न हो, ३. परब्रह्म, ईश्वर का एक नाम, ४. निर्जर, देवता 👇}
#अपराजिता { १. जो जीती न गयी हो, अजेय, २. दुर्गा, ३. विष्णुकांता, ४. अयोध्या नगरी }
@अपराजित { १. जो जीता न गया हो, अजेय, २. विष्णु }
#नंदा { १. दुर्गा✔, २. गौरी, ३. धन-सम्पत्ति, ४. आनंद देनेवाली, ५. शुभ }
#नंदिनी { १. पुत्री, बेटी 👇, २. दुर्गा✔, ३. उमा }
#महादेवी { १. दुर्गा ✔, २. राजा की प्रधान पत्नी, पटरानी }
दर्शन:- अवलोकन, आमना-सामना, भेंट, मिलन, मुलाकात, मेल-जोल, मेल-मिलाप, रब्तजब्त, साक्षात्कार, हेलमेल
दास:- अनुचर, आज्ञाकर, किंकर, खिदमतगार, गुलाम, गोप्यक, चाकर, टहलुआ, टहलू, ताबेदार, नौकर, नैर्देशिक, जोषक, परिचर, परिचारक, परिकर्मी ( परिकर्मिन् ), पारिकुट, पार्श्वानुचर, भृत, भृतक, भृत्य, सेवक, सेवाजन
दासी:- अनुचरी, किंकरी, चाकरानी(✔), टहलनी, टहलुई, दासिका, नौकरानी, परिचरी, परिचारिका, बाँदी, भृता, भृत्या, लौंडी, सेविका
दामिनी:- अशनि, कौंधा, क्षणप्रभा, गाज, घनज्वाला, घनदाम, घनवल्ली, चपला( 👆 ), चंचला*, तड़ित, दामिनी*, बिजली ( 👇 ), बिजुरी(❓), बीजुरी(✔), विद्युत्, शंपा, सौदामिनी, ह्रदिनी*
दीपावली:- चरागान, दीवाली, दीपमालिका, दीपमाला, दीपोत्सव, प्रकाशपर्व, प्रकाशोत्सव
दु:ख:- अंदोह, अवसाद, आपदा, आफत, आभील, उदासी, कष्ट, क्लेश, खेद, जहमत, तकलीफ, तरदुदुद, दर्द, पीड़ा, पीर, मुसीबत, यंत्रणा, यातना, रंज, वियम*, विपत्ति, विषाद, वेदना, व्यथा, शोक, संकट, संताप, खटका
#वियम { १. संयम, इंद्रियदमन, २. दुःख, क्लेश, यातना, ३. प्रतिबंध, रोक, नियंत्रण, ४. विराम, पड़ाव }
दूध:- दुग्ध, क्षीर*, गोरस*, पय*(पयस्), पीयूष*
#क्षीर { १. दूध, २. खीर, ३. पानी }
#क्षीर { ~निधि=क्षीरसागर, ~नीर= (१. आलिंगन, गले मिल जाना, २. दूध और जल), ~नीर करना/~नीर विवेक = दूध का दूध, पानी का पानी करना अर्थात् सही गलत का विवेक, ~पाक=दूध में पकाया हुआ, ~मय=दूग्ध-युक्त, ~व्रत=केवल दूध पीकर रहने वाला, ~सागर=क्षीरनिधि }
#क्षीरपाकौदन {(क्षीर + पाक + ओदन) दूध में पकाया हुआ चावल खीर, जाउर; उ॰—क्षीरपाकोदन अर्थात् दूध में पकाए हुए भात ( जिसे खीर कहते हैं ) का उल्लेख ऋग्वेद में है। }
#गो { १. गाय, २. इंद्रिय, ३. वाणी, ४. जिह्वा👆, ५. देखने की शक्ति, दृष्टि, ६. दिशा, ७. माता, जननी }
#गो {~कुंजर=बलिष्ठ बैल, ~घात=गोहत्या, ~घातक/घाती=कसाई, ~जल=गोमूत्र, ~धूलि=साँझ, शाम, ~पति=गाय का स्वामी, गोपाल *, ~पद=गोखुर, ~पाल=१. गऊ का स्वामी, २. अहीर, ग्वाला, ३. इंद्रियों का पालन एवं रक्षा करने वाला, मन, ४. कृष्ण*, ~मय/मल=गोबर, ~मुख=१. गाय का मुख, २. गंगा का उद्गम स्थान जो गोमुखाकृति है, गंगोत्री, ~रस=१. गाय का दूध, २. दही, ३. छाछ, मट्ठा आदि, ~रसा=जो गाय का दूध पीकर पला हो ऐसा बच्चा, ~लोक=स्वर्ग, ~वर्धन=१. गायों को पालने का काम, २. वृंदावन का एक पर्वत जिसे कृष्ण ने उठाया था, ~सर्ग=गायों को बाहर छोड़ने का समय/प्रात: काल, ~स्वामी=जितेन्द्रिय }...#गो(फ़ा०)= गुप्तचर, जासूस, भेदिया
#पय { १. दूध २. पानी }, पयस्व { दूध से बनी वस्तु }, पयस्विनी { १. नदी, सरिता, २. दुधारू गाय 🐮 }, पयस्वी { १. दूध से युक्त, २. जलमय }, पयहारी { १. केवल जल पीकर रहने वाला व्यक्ति या साधु , २. केवल दूध पीकर रहने वाला व्यक्ति या साधु }
#पीयूष { १. अमृत, सुधा, २. दूध, ३. नव- प्रसूता गाय का दूध (५/६दिन) इसे पेउस/पेउसी(बोली✔) कहते हैं }
#पीयूष { ~द्युति, ~धाम, ~भानु, ~भुक, ~मयूख, ~महा, ~रुचि=चंद्रमा 👆 }
देवता:- अजर, अमर, अमर्त्य, अमृतेश*, अपहर्य, आदित्य, त्रिदश, देव, निर्जर, विबुध (✔ ), विवुध ( ❌ ), सुर
#अमृतेश { १. देवता, २. शिव }
#आदित्य 👆 { १. अदिति के पुत्र, २. देवता, ३. सूर्य, ४. इंद्र }
देह:- अंग, अप्तु*, कंकालय, कलेवर, काय, काया, कुड़ि, क्षत्र, गात ( गात्र ), गात्र, चोला, जिस्म, जीवमंदिर, घट, तन, तनु, बदन, प्राणसद्म ( प्राणसद्मन् ), मूर्ति, मूर्त्तिमान्, पिंड, रोगभू, वपु, विग्रह, शरीर, शरीरक
#अप्तु { १. शरीर, गात्र, अंग, २. सोम, ३. यज्ञीय पशु, बलि पशु }
द्रौपदी:- कृष्णा, कृष्णसखी, त्रिहायणी, द्रुपदसुता, द्रौपदेय, नित्ययौवना, पंचभर्तारी*, पुण्यश्लोका*, पांडुशर्मिला, पांचाली, वेदिजा, याज्ञसेनी, सत्यसंधा, सैरंध्री,
दरवाजा:- किवाड़, कपाट, पल्ला, पुरतोरण, प्रवेशद्वार, फाटक, मंगलद्वार, तोरण, दरबंद, द्वार, निकासद्वार
धनंजय:- अर्जुन के १० नाम - १. अर्जुन, २. कृष्ण, ३. किरीटी, ४. जिष्णु, ५. धनंजय, ६. फाल्गुनि, ७. विजय, ८. वीभत्सु, ९. श्वेवाहन, १०. सव्यसाची
#अन्य नाम:- कृष्णसखा, कृष्णसरथि / कृष्णसारथि, कीशध्वज, कीशकेतु, पार्थ, पृथातनय, पृथाज, कौन्तेय, गुडाकेश, गांडीवधन्वा, गांडीवधारी, गांडीवी(गांडीविन्), गांडीवधर, चित्रयोधी, वृहन्नला, परंतप, शिवमल्लक, सुभद्रेश, कर्णजित्
#'गीता' में आने वाले नाम- 'पार्थ', 'भारत', 'धनंजय', 'पृथापुत्र', 'परन्तप', 'गुडाकेश', 'निष्पाप' तथा 'महाबाहो',
धनुर्धर:- इषुधर*, इष्वास* कमनैत, कमानदार, क्षिपक*, चापी ( चापिन् )*, तीरंदाज, तूणधर, तूणधार, धनुर्ग्राह, धन्वी, धन्वायी ( धन्वायिन् )*, धनुषधारी, धनुष्कर*, धानक*, धानकी*, धानुक*, निषंगी*, निषंगथि*, सरबंधी ( शरबंध ), सिनाकश, सुप्रयुक्तशर
#इषु { बाण, तीर 🎯 }
#इष्वास { १. बाण चलाना, २. धनुष, ३. धनुर्धर, ४. योद्धा }
#क्षिपक { (क्षिपिका-स्त्री०) योद्धा, धनुर्धर }
#चापी { १. वह जो धनुष धारण करे, धनुर्धर, २. शिव, ३. धनुराशि }
#धन्वायी { १. धनुर्धर, २. रुद्र }
#धनुष्कर { १. धनुर्धारी, २. धनुष निर्माता }
#धनुर्द्धर/धनुर्द्धारी/धनुर्धारी (✔)
#धानक { १. धनिया, २. धनु चलाने वाला }
#धानकी/धानुक { १. धनुर्धर, धनुर्धारी, २. कामदेव }
#धानुक { १. धनुर्द्धर, कमनैत, २. कहारों की तरह सेवा करने वाली एक जाति, ३. इस जाति का व्यक्ति, कहार }
#निषंगी { १. आसक्त, २. धनुर्धारी, ३. खड्गधारी }
#निषंग { १. तरकश, तूणीर, २. तलवार }
#निषंगथि { १. आलिंगन, २. रथ, ३. कंधा, ४. तृण, ५. सारथीं, ६. धनुष धारण करनेवाला, धनुर्धर }
धनुष:- इष्वास, कमान, कोदंड*, चाप*, धनु, धनुआ, धनुई, धनुक, पिनाक(❓), विशिखासन, शरासन
#कोदंड { १. धनुष, २. धनु राशि, ३. भौंह }
#चाप { १. चापने की क्रिया, २. पैरों की आहट, ३. धनुष, ४. वृत्त की परिधि का कोई भाग, ५. मेहराब }
#धनुआ { १. कमान, धनुष, चाप, २. धुनकी*}
#धुनई { १. छोटा धनुष, २. धुनकी* }
#धनु/धनुक { कमान, धनुष }
#धुनकी { १. रुई धुनने का एक प्रसिद्ध उपकरण, फटका, २. धनुष }
#पिनाक { शिव का धनुष }
#पिनाकी { शिव, महादेव }
धन:- जायदाद, द्रव्य, दौलत, निधान, निधि, पैसा, माल*, माया*, रकम, रुपया, लक्ष्मी, सम्पत्ति ( 👇 ), श्रीत्वम्(❓)
{ धन-दौलत, रुपया-पैसा, जमीन-जायदाद, जीवनोपाय }
#निधान { १. सम्पत्ति, निधि, २. स्थापना, ३. आधार, आश्रय; जैसे - करुणा-निधान }
#निधि { १. सम्पत्ति, धन-दौलत, २. आश्रय स्थान; जैसे - दयानिधि, ३. विशेष उद्देश्य हेतु संचित धन, फंड ; जैसे - भविष्यनिधि, ४. समुद्र, ५. आधार, घर; जैसे- जलनिधि, गुणनिधि, ६. विष्णु, ७. शिव, ८. व्यक्ति जो विविध गुणयुक्त हो, ९. वह स्थान जहाँ संपत्ति, द्रव्य आदि रखा जाय, १०. कुबेर के नौ प्रकार के रत्न । ये नौ रत्न ये हैं—पदम, महापद्म, शंख, मकर, कच्छप, मुकुंद, कुंद, नील और वर्च्च, ११. गड़ा हुआ खजाना, खजाना }
#माल { १. कीमती वस्तु, २. धन-दौलत, रुपया-पैसा, ३. लगान के रूप में दिया गया धन अर्थात् माल-गुजारी, लगान, कर, ४. सुन्दर और स्वादिष्ट 😋 भोजन 🍴, ५. युवती और सुन्दर स्त्री जैसे -माल के पीछे भागना }
#माया { १. धन, २. दया, ममता, ३. माँ, ४. दुर्गा का एक नाम , ५. सृष्टि को उत्पत्ति का मुख्य कारण, प्रकृति, ६. मोहकारिणी शक्ति, ७. इंद्रजाल, जादू, ८. छल, कपट, धोखा, चालबाजी, १०. भ्रमवश होने वाला प्रेम, अनुराग; जैसे - रूप की माया, ११. ममत्व, ममता, १२. अविद्या, अज्ञानता, भ्रम; जैसे - माया मृग, १३. ईश्वरीय शक्ति; जैसे - प्रभु की माया, १४. मय दानव की कन्या जो विश्रवा को ब्याही थी और जिससे खर, दूषण, त्रिशिरा और सूर्पनखा पैदा हुए, १५. प्रज्ञा, बुद्धि, अकल, १६. कोई आदरणीय स्त्री, १७. गौतम बुद्ध की माता का नाम, १८. कोई आदरणीय स्त्री, १९. कृपा, दया, अनुग्रह }
#श्रीत्वम्{ धनिकता-सम्पत्ति = bonanza opulence prosperity wealth = ऐश्वर्यम् प्रभुत्वम् धनिकता प्रतापम्
नदी:-अपगा, आपगा, ऋषिकुल्या*, कल्लोलिनी, कूलंकषा, कूलवती, जलधिका*, तटक, तटिनी, तटी*, तरंगवती, तरंगिणी, दरिया, धुनी*, नदिया, निर्झरणी, निम्नगा, पयस्विनी, वाहिनी*, समुद्रगा*, सरि, सरित्, सरिता, स्रवंती*, स्रोतस्विनी, ह्रदिनी*
#ऋषिकुल्या { एक नदी का नाम जिसका उल्लेख महाभारत के ती्र्थयात्रा पर्व में है }
#तटी { १. नदी का किनारा, कूल, तट, २. नदी }
#जलधिका = नदी ... जलधि = समुद्र ... जलद = मेघ, बादल
#तरिणी(❓)...तरणी = तरनी = नाव, नौका ... तरणि = सूर्य
#धुनी = नदी, ...सुरधुनी = गंगा 👆
#वाहिनी { १. सेना, २. नली; जैसे-रक्तवाहिनी, ३. नदी }
#समुद्रगा { १. नदी जो समुद्र की ओर गमन करती है, २. गंगा का एक नाम 👆 }
#स्रवंती {१. नदी, दरिया, २. प्रवाह, धारा, ३. एक प्रकार की वनस्पति, ४. प्लीहा का क्षेत्र, यकृत् प्रदेश }
#ह्रदिनी { १. नदी, २. बिजली, विद्युत् }
नरक:- अधोनिलय, जहन्नुम, दोज़ख, दुर्गति, निरै ( निरय ), पापलोक, प्रेतपुर, प्रेतलोक, यमलोक, यमपुर, यमालय, यमसदन, संयमनी
नमक:- जलरस, नोन, नून, रामरस*, लवण ( तत्सम ), लोन
#रामरस { १. नमक, २. पीसी या बनी हुई भंग ( मदरास ) }
नक्षत्र:- अख्तर*, उड्डु, ऋक्ष*, खद्योत*, तरई ( तारा ), तारा*, तारक*, सितारा*, स्तृ
#अख्तर { १. सितारा, तारा, नक्षत्र , २. ध्वज 👆, ३. भाग्य, प्रारब्ध, किस्मत 👉 मुहा॰—अख्तर चमकना = भाग्योदय होना, नसीब खुलना, अच्छे दिन आना }
#ॠक्ष { १. भालू, २. तारा }
#खद्योत { १. जुगनूँ, २. सूर्य }
#तारा { १. सितारा, नक्षत्र, २. बालि की पत्नी का नाम जिनके पुत्र अंगद थे, झर्झरिका, ( ताराकुमार=अंगद; तारेय=अंगद }
#तारक { १. नक्षत्र, तारा, २. आँख, ३. आँख की पुतली, ४. इंद्र का शत्रु एक असुर, नारायण ने नपुंसक रूप धारण करके इसका नाश किया, ५. एक असुर जिसे कार्तिकेय ने मारा था- 'तारकासुर' यौ॰—तारकजित्, तारकरिपु, तारकवैरी, तारकसूदन = कार्तिकेय , ६. राम का षडक्षर मंत्र जिसे गुरु शिष्य के कान में कहता है और जिससे मनुष्य तर जाता है- 'औ' रामाय नमः', ७. वह जो पार उतारे, ८. कर्णधार, मल्लाह, ९. भवसागर से पार करनेवाला, तारनेवाला, १०. एक वर्ग का नाम, जो अंत्येष्टि कराता है—'महाब्राह्मण', ११. गरुड़, १२. कान, १५. महादेव, १६. मुद्रण में तारे का चिह्न- * }
#सितारा { १. तारा, नक्षत्र, २. भाग्य, प्रारब्ध, नसीब }
नंगा:- नग्न ( तत्सम ), अनाच्छादित, अनावृत, असंवृत, आवरणहीन, उघारा, उघाड़ा, उघरारा, खुला, दिगम्बर, नंग-घड़ंग, निरावरण, निरावृत, निर्वस्त्र, विवस्त्र, वस्त्रहीन, व्यावृत्ति
नश्वर:- अध्रुव, अनित्य, अस्थायी, अस्थिर, क्षणभंगुर, क्षणिक, क्षयवान्(स्त्री०-क्षयवती), क्षीयमाण, क्षर*, गत्वर, चंदरोजा, नाशधर्मी, नाशमय, नाशमान्, नाशवान्, नाशाधीन, मरणधर्मा, मरणशील, विनाशधर्मा, विनाशी, विशरारु
#क्षर { १. नाशवान्, नष्ट होनेवाला, २. चल, जंगम, १. जल २. मेघ }
नारी:- औरत, कामिनी, तनु*, भामा, भामिनी, महिला, रमणी, रमण्या, ललना*, ललिता*, वनिता, वामा, सुध्युपास्या*, स्त्री
#तनु { १. शरीर, देह, बदन, २. चर्म, त्वचा, ३. नारी, औरत, स्त्री✔, ४. कृश, दुबला-पतला, ५. अल्प, थोड़ा, ६. तुच्छ, ७. छिछला, ८. कोमल, सुकुमार, ९. अच्छा, बढ़िया, १०. विरल, ११. केंचुली ...१२. ~ज=पुत्र, १३. ~जा=पुत्री }
#जोरू, पत्नी, अर्द्धांगिनी ...❓
#ललना ( नारी )...ललन ( बालक )
#ललिता { १. महिला, कामिनी, सुंदरी स्त्री, २. दुर्गा का एक नाम 👆, २. राधिका की प्रधान आठ सखियों में से एक, ३. कस्तूरी, ४. पुराणोक्त एक नदी, ५. एक रागिनी }
#सुध्युपास्या { १. औरत 👩, नारी, स्त्री, २. पार्वती, उमा, ३. पार्वती की एक सखी, ४. एक प्रकार का रंग 🎨 }
नाव:- किश्ती, गामिनी, जलपोत, जलयान, डोंगा, डोंगी, तरंड*, तरंडपादा, तरंती, तरणी, तरी, नाय, नौका, नैया, पतंग, पोत, प्लवाका*, बतवन्हा, बेड़ा, भेलक, वहित्र, वाधू*, वार्बट
#तरंड { १. नाव, नौका, २. मछली मारने की डोरी में बँधी हुई लकड़ी जो पानी के ऊपर तैरती रहती है, ३. नाव खेने का डाँड़ा, ४. बेड़ा }
#तरंडपादा { एक प्रकार की नाव }
#पतंग { १. सूर्य👆, २. नाव✔, ३. टिड्डी(grasshopper), शलभ, ४. फतिंगा/पतिंगा(moth), ५. कनकौआ/कनकौवा, गुड्डी, पतंग (उड़ने वाली जो कागज़ की होती है) ६. गेंद, कंदुक, ७. पक्षी👇 }
#प्लवाका=नाव, @प्लवक { १. तैरनेवाला, तैराक, २. संतरणोपजीवी, जैसे मल्लाह, ३. तलवार की धार पर नाच करनेवाला पुरुष, ४. मेंढ़क }
#वाधू { १. नाव का डाँड़ , २. नौका, नाव }
नाविक:- कर्णधार, केवट, कैवर्त ( तत्सम ), डाँड़ी, तारक, धीमर, धीवर ( तत्सम ), नौचालक, नावचालक, नावी, पोतवाह, पोतचालक, मल्लाह, माँझी
नित्य:- अक्षय, अखीन ( अक्षीण ), अनश्वर, अमर, अमर्त्य, अविनश्वर, अविनाशी, अहरह, अहर्निश*, चिरस्थायी*, त्रिकालव्यापी, ध्रुव*, निरंतर, शाश्वत, सतत्, सदा*, सदैव, सनातन, सर्वदा,
#अहर्निश { १. रातदिन✔, २. सदा, नित्य }
#नित्य:- { १. प्रतिदिन, रोज, सदा, हर रोज, ~कर्म २. अनवरत, सदा, सर्वदा, हर समय, हमेशा, ३. अविनाशी, शाश्वत, निरंतर }
नियति:- अख्तर*, अदृष्ट*, अवश्यंभावी(❓), कालयोग, किस्मत, तक़दीर, दिष्ट*, दिष्टि*, दैव, दैवगति, दैवीगति, दैव्य, नसीब, प्राक्तन, प्रारब्ध, भवितव्य, भवितव्यता(स्त्री०), भाग्य, भावी, मुकद्दर, लिखनी*, विधना*, विधि, होतब, होतव्यता, होनहार, होनिहार(स्त्री०), होनी
#अख्तर { १. सितारा, तारा, नक्षत्र 👆, २. ध्वज 👆, ३. भाग्य । प्रारब्ध । किस्मत 👉 मुहा॰—अख्तर चमकना = भाग्योदय होना, नसीब खुलना, अच्छे दिन आना }
#अदृष्ट { १. न देखा हुआ, २. भाग्य 🌠 }
#दिष्ट { १. भाग्य, किस्मत, २. उपदेश, ३. समय, काल, ४. निश्चित, बतलाया हुआ, ५. दिखलाया हुआ }
#दिष्टि { १. भाग्य, २. उत्सव, प्रसन्नता }
#दैव { १. देवता संबंधी; जैसे - दैव कार्य, २. देवता की ओर से होने वाला कार्य; जैसे - दैव-गति, ३. होनी, प्रारब्ध ✔ , ४. ईश्वर, विधाता👆}
#दैवगति { १. ईश्वरीय घटना, २. भाग्य 🌠, किस्मत }
#दैवीगति { १. ईश्वरीय गति, २. भावी, होनहार }
#दैव्य { १. देवता संबंधी २. दैव, ३. भाग्य 🌠 }
#लिखनी { (लेखनी) १. कलम, २. भाग्यलिपि, प्रारब्ध, होनी, ३. लिखन की क्रिया या भाव }
#विधना { १. बेधना, २. प्राप्त करना, ३. बेधा जाना, ४. फंसाया जाना, ५. होनी, अदृष्ट ✔ }
@नियतेंद्रिय=नियतात्मा=जितेंद्रिय
निर्धन:- अकिंचन, अनिभ्य, अवित्त, कंगाल, कठेर*, गतार्थ*, गरीब, तंगहाल*, दरिद्र, दीन*, दु:स्थ*, धनहीन, भिन्नमर्याद, मुफ़लिस, रंक, विधन
#गतार्थ { (गत=नष्ट/विहीन/रहित या प्राप्त) १. धनहीन, निर्धन, २. अर्थरहित, अर्थहीन, ३. जाना या समझा हुआ, ४. बेकार }
#तंगहाल { १. निर्धन, गरीब, २. विपद्ग्रस्त, कष्ट में पड़ा हुआ, ३. बीमार, रोगग्रस्त, मरणासन्न }
#दीन { १. दयनीय दशा वाला, २. गरीब, दरिद्र, ३. दु:खी एवं संतप्त, ४. उदास, खिन्न, ५. धर्म, मजहब }
#दु:स्थ { १. दुर्दशाग्रस्त, २. निर्धन, ३. मूर्ख }
#भिन्नमर्याद { १. जिसने मर्यादा भंग कर दी है, २. जो निर्धन हो, आनियंत्रित }
#अवित्त { १. निर्धन, २. अप्रसिद्ध, ३. अज्ञात }
न्यायाधीश:- अक्षपाटक, अधिकरणभोजक, अधिकरणिक, आधिकरणिक*, जज, धर्माधिकरणिक, धर्माधिकारी, धर्माध्यक्ष, धर्माधिपति, न्यायकर्ता, न्यायाधिकारी, न्यायाधिपति, न्यायाध्यक्ष, न्यायमूर्ति, प्राडविवाक*, मुंसिफ, वारवाणि*, विचारक, विचारकर्ता, विचारपति, विचाराध्यक्ष, व्यवहारद्रष्टा(व्यवहारद्रष्ट), विवाक
#आधिकरणिक { १. न्यायाधीश, २. सरकारी अधिकारी }
#न्यायाधिवक्ता=एडवोकेट
#वारवाणि { १. वंशी बज, नेवाला, २. उत्तम गायक, ३. घर्माध्यक्ष, न्यायाधीश, जज, ४. ज्यौतिर्विद, ज्योतिषी, ५. वर्ष, ६. वेश्या, रंडी }
नरेन्द्र:- अवनिप/अवनीप, धरणीश्वर*, धराधिपति, धराधीश, नरपति, नरपाल, नरेश, नृप, नृपति, नृपाल, नरेश्वर, भट्टारक*, भूप, भूपति, भूपाल, भूमिपति(=भूपति), भूभर्ता*, भूभृत्*, महीप, महीपति, महीपाल, राजन्, राजा, राजाधिराज*, राजेश्वर*, रायरायान*, राव, सम्राट्
#धरणीश्वर { १. शिव, २. विष्णु, ३. भूपति, राजा✔ }
#नृ = नर, मनुष्य
#भूभर्ता { (भू + भर्तृ) १. पृथ्वी का स्वामी, राजा, २. पर्वत, भूधर }
#भूभृत् { १. राजा, २. पहाड़ ३. विष्णु }
#भर्तृ/भर्ता/भृत्= पालन-पोषण करने वाला, स्वामी
#राजाधिराज { राजाओं का राजा, सम्राट }
#राजेश्वर = राजाधिराज
#रायरायान { १. राजाधिराज, राजाओं के राजा, २. मुगलों के समय का एक उपाधि जो प्रायः रईसों, जमीदारों और राजकर्मचारियों आदि को दी जाती थी, ३. अलाउद्दीन खिलजी ने देवगिरि के शासक 'रामदेव' को "रायरायान" की उपाधि दी थी }
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
If you have any doubt or suggestions, please let me know.